नीमच। शिवराज सरकार विधानसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में आदिवासियों के विकास का जमकर ढिंढोरा पीट रही है। लेकिन नीमच के आदिवासी बहुल इलाके एकता बस्ती की कहानी एकदम उलट है। यहां के हालात आदिवासियों के विकास के ढोल की पोल खोल रहे हैं।
बस्ती में रहने वाले गरीब आदिवासियों की दुर्दशा आदिम युग की कहानी बयां करती है। यहां के हालात देखकर लगता है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए यह केवल वोट के लिए गिनती में आने वाले चेहरे है। शासन द्वारा जहां इन्हें अभी विस्थापित किया गया है, कई बार किए गए वादों के बावजूद उस भूमि के पट्टे नहीं मिले। गंदगी की वजह से बच्चे से लेकर बूढ़े तक बीमारी में जकड़े रहते हैं। नाली निर्माण जैसी कोई चीज यहां नहीं है। जरा सी बारिश में मिट्टी से बने कच्चे घरों की दीवारें ढह रही है। घरों में घुटनों तक पानी बह रहा है। जहरीले जानवर बच्चों की जान ले रहे हैं। लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
इस बस्ती से राष्ट्रीय स्तर के उदय सिंह जैसे कलाकार निकले हैं। जिसने अपनी कला से नीमच का नाम देश में रोशन किया। फिलहाल सरकार केवल इस जुगत में है कि कैसे खोखले वादे करके आदिवासी बहुल 70 सीटों पर कब्जा किया जाए। बंगला नंबर 60 से इन लोगों को यह कहकर एकता कॉलोनी में भी स्थापित किया गया था कि तुम्हें यहां सर्वसुविधा युक्त बस्ती में बसा देंगे। अब आदिवासी औसत दर्जे की सुविधा वाला मानवीय जीवन जीने की मांग करते हुए अपनी जिंदगी काट रहे है।