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July 25, 2023, 5:54 pm
KHABAR : निःस्वार्थ मित्रता का प्रतीक श्री कृष्ण सुदामा चरित्र, श्रीमद् भागवत कथा में पं. कपिल पौराणिक ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, पढ़े खबर 

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नीमच। मित्रता मेंऊंच और निच  नहीं देखनी चाहिए मित्र एक दूसरे के पूरक होते है। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वाेपरि मानते हुए श्री कृष्ण से कुछ नहीं मांगा ।सुदामा चरित्र जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की शिक्षा देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुए अपने लिए कुछ नहीं मांगा ।अर्थात निस्वार्थ समर्पण की असली मित्रता है।यह उद्गार पंडित कपिल पौराणिक ने व्यक्त किए। वे   भोलाराम कंपाउंड  के समीप  शिव मंदिर परिसर  में श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा संसार को प्रेम के साथ जीवन जीने का संदेश देती है।माखन का अर्थ स्नेह मिश्री का अर्थ प्रेम होता है मटकी का अर्थ यहां शरीर से होता है। प्रेम के मनुष्य शरीर का जीवन  अधूरा रहता है। भगवान श्री कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा जो कि अत्यधिक निर्धन थे लेकिन कृष्ण के नाम का बहुत सारा धन उनके पास था कभी किसी के पास उन्होंने जाकर किसी भी प्रकार की याचना नहीं की और और उनके इसी स्वभाव से प्रसन्न होकर भगवान ने उनको धरती और स्वर्ग में रहने वाले राजाओं को जो सुख मिलता है वह सुख प्रदान किया ।बचपन के मित्र सुदामा पर कृपा करके भगवान ने मानो यह संदेश दिया कि मित्र के सुख-दुख को देखकर अपने   दुख को भी भूल कर मित्र की सहायता करना ही सच्ची मित्रता कहलाता है ।मित्रता वह नहीं है जो हमें गलत आदतों में डाले बुरी संगत में डाले इसलिए मित्र भी बनाओ तो बड़े सोच समझकर और जो तुम्हें ऊंचाइयों का रास्ता दिखाइए वही सच्चा मित्र होता है । 7 दिनों तक कथा सुनने के बाद जब  सुखदेव जी द्वारा परीक्षित से पूछा गया कि यदि तुम्हें तक्षक नाग डसेगा तो क्या तुम मरोगे ।तब राजा परीक्षित ने कहा कि हे भगवान में तो श्रीमद् भागवत कथा सुनकर मुक्त हो गया हूं अब तो यह शरीर नश्वर है वही नष्ट होगा में तो भगवान श्री कृष्ण की कथा सुनकर स्वतः ही मुक्त हो गया हूं। श्री कृष्ण ने यमला अर्जुन वृक्ष का कल्याण किया।
मीरा की कृष्ण के प्रति इतनी समर्पित भक्ति थी कि कहती थी कि मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई। भजन  प्रस्तुत किये। महाराज श्री नेश्री कृष्ण  गोपी संवाद के प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
महाराज श्री ने इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा महाराज श्री एवं संगीत कलाकारों की टीम एवं व्यास पीठ पर विराजित विद्वान पंडितों का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया। श्रीमद् श्रीमद् भागवत का शोभायात्रा  से विश्राम हुआ। शोभा यात्रा राम मंदिर , सत्य पथ  दाना गली होते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई।
कृष्ण सुदामा मिलन देखकर भाव  विहल हुए श्रद्धालु
भागवत कथा के दौरान जब पंडित कपिल पौराणिक ने कृष्ण सुदामा मिलन का प्रसंग बताया तो था तभी कृष्ण सुदामा की झांकी नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जिसे देखते ही भक्ति पांडल में श्रद्धालु  श्रद्धालुओं ने जय जय श्री कृष्ण की जय घोष लगाई । कृष्ण सुदामा का मार्मिक चित्रण देखकर  श्रद्धालुओं  की नम आंखों से अश्रुधारा बहने लगी इस अवसर पर अरे द्वारपालो जाकर के कन्हैया से कह दो दर पर सुदामा करीब आ गया है भजन पर श्रद्धालुओं ने करतल ध्वनि से अभिनंदन किया ।नाटिका में सुदामा पार्थ शर्मा, राघव जैन श्रीकृष्ण व, द्वारपाल विष्णु तोतला ,सनत मंडोवरा ने प्रभावी अभिनय प्रस्तुत किया।

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