नीमच। संसार में रहते हुए मनुष्य जीवन में जब पुत्र- पुत्री का विवाह करता है तो आभुषण सोने के और वस्त्र महंगे वाले उपयोग करता है लेकिन जब परमात्मा का कोई अनुष्ठान करता है तो सोने चांदी के गहने का उपयोग नहीं करता है और पूजा के लिए महंगे वस्त्र भी नहीं खरीदता है।हमें सब कुछ देने वाला परमात्मा ही होता है उसके लिए तो सोने चांदी हीरे जवाहरात से जुड़े कपड़े और सामग्री का उपयोग करना चाहिए ताकि परमात्मा हमें मंगल आशीर्वाद प्रदान कर सकें।
यह बात जैन श्वेतांबर भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में बंधु बैलडी पूज्य आचार्य श्री जिनचंद्र सागर जी मसा के शिष्य रत्न नूतन आचार्य श्री प्रसन्न चंद्र सागर जी मसा ने कही ।वे चातुर्मास के उपलक्ष्य में मिडिल स्कूल मैदान के समीप जैन भवन में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि परमात्मा के प्रति समर्पण का भाव पुण्य बढ़ाता है अष्ट प्रकारी पूजा का फल पुण्य शाली होता है। गुरु के मार्गदर्शन में विवाह मांगलिक कार्यक्रम आदि करना चाहिए संसार का व्यापार में भी गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए ताकि जीव हिंसा नहीं हो और गुरु हमें संस्कारों के साथ अनुशासन में रहते हुए सत्य और भलाई का मार्ग दिखाते हैं।परमात्मा की भक्ति के लिए तीन माला का जाप प्रतिदिन करना चाहिए ताकि हमारे जीवन में भी पुण्य का बैलेंस बढ़ सके। समर्पण भाव सदैव पुण्य बढ़ाता है।भौतिक संसाधनों में सुख देने की शक्ति नहीं है मनुष्य को यदि सच्चा सुख चाहिए तो अध्यात्म और परमात्मा की वाणी का श्रवण तथा भक्ति तपस्या उपवास और साधु संतों का सानिध्य प्राप्त करना होगा। मनुष्य संसार के अनेक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों का स्वाद चखने के बाद भी भूखा ही रहता है। यदि परमात्मा की वाणी का श्रवण करे तो उसकी भुख मिट सकती है। चिंतामणि रत्न से भी ज्यादा अनमोल मनुष्य जन्म होता है। मनुष्य का जन्म पुरुषार्थ के अधीन है और मनुष्य पुण्य के अधीन है।
श्री संघ अध्यक्ष अनिल नागौरी ने बताया कि धर्मसभा में तपस्वी मुनिराज श्री पावनचंद्र सागरजी मसा एवं पूज्य साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी मसा की शिष्या श्री भद्रपूर्णा श्रीजी मसा आदि ठाणा 4 का भी चातुर्मासिक सानिध्य मिला।पूज्य आचार्य भगवंत का आचार्य पदवी के बाद प्रथम चातुर्मास नीमच में हो रहा है। उपवास, एकासना, बियासना, तेला, आदि तपस्या के ठाठ लग रहे है। धर्मसभा में जावद ,जीरन, मनासा, नयागांव, जमुनिया,जावी, आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु भक्त सहभागी बने। धर्मसभा का संचालन सचिव मनीष कोठारी ने किया।