जावद। नीमच जिले से लगभग 15 किलोमीटर दूर एक नगर ऐसा है जहां पर 8 साल पहले एक घटना घटित हुई थी, जिसको लेकर नगरवासी वर्ग विशेष के त्योहारों पर व्यवसाय बंद रखकर अपना विरोध प्रदर्शन करते हैं। इस विरोध प्रदर्शन में सभी व्यवसायी अपनी दुकान दिनभर विरोध स्वरूप पूर्णतया बंद रखते हैं।
जावद नगर की यह बात लगभग 8 वर्ष पूर्व की है। 4 अप्रैल 2015 को हनुमान जन्मोत्सव का पर्व था। नगर में हनुमान जन्मोत्सव हर वर्ष बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसा ही कुछ 4 अप्रैल 2015 को भी होना था, संपूर्ण नगर में साज सज्जा आदि कर दी गए थी। जगह-जगह शोभायात्रा के स्वागत की तैयारियां भी पूर्ण हो चुकी थी। बस स्टैंड परकोटा हनुमान मंदिर से पैदल भव्य शोभायात्रा भी निकलना शुरू हो गई। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए जैसे ही नगर के खुर्रा चौक पर पहुंची तो वर्ग विशेष के कुछ व्यक्तियों द्वारा शोभायात्रा पर पथराव शुरू कर दिया। शोभायात्रा में भगदड़ मच गई। अफरा तफरी का माहोल हो गया। उपद्रव ने इतना उग्र रूप ले लिया की प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। धीरे उपद्रव शांत हुआ और प्रशासन ने ढील देना शुरू किया। मगर मन में जो ठेस थी वह विरोध स्वरूप निकली और नगर में वर्ग विशेष के त्योहारों पर नगर बंद होने लगा। जिसमे ना किसी तरह का कोई एलान और ना ही किसी प्रकार का कोई सोशल मीडिया पर मेसेज होता है, मगर फिर भी नगर सुबह से बंद रहता है। जिसे खुलवाने का पुरजोर प्रयास भी किया गया। शासन प्रशासन ने भी बाजार खुलवाने का पूरा और हर संभव प्रयास किया। मगर बाजार नही खुला और आज ये नगर बंद एक परंपरा की तरह हो गया। जिसे सभी नगरवासी पिछले 8 साल से निभा रहे है। नगर के कुछ व्यापारी अपनी दुकानें खोलने को तैयार है, आपसी सौहार्द फिर से कायम करने का प्रयास करने के लिए मगर हो सकता है कि उनकी संख्या कम हो, इस कारण वे भी सफल नहीं हो पा रहे है। आपसी सौहार्द फिर से कायम हो इसकी सभी मिलकर प्रयास करेंगे तो जरूर सफल होंगे। नगर पहले की तरह हो सभी त्योहारों को सभी के साथ मिलकर मनाया जाए जैसे पहले मनाते थे। अब देखना यह है कि ये जावद नगर की ये बंद की परंपरा कब खत्म होगी।