मोरवन। नीमच जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर अरावली पर्वत की पहाड़ियों में पवित्र नदी गंभीरी के समीप हाटकेश्वर महादेव मंदिर जो क्षेत्र में वानर खो के नाम से जाना पहचाना जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। बारिश के मौसम में यहां की सुंदरता हरे-भरे पेड़ पौधे वनस्पति देखते ही बनते हैं।सावन मास में यहां जिले सहित दूरदराज से लोग भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पहुंचते हैं। जावद तहसील में ग्राम दड़ौली से 7 किलोमीटर दूर ग्राम झिलमीर महेन्द्री होते हुए जंगल के रास्ते से यहां पहुंचते हैं।
विशेषता-
यह मंदिर अरावली पर्वत की खूबसूरत वादियों के बीच पवित्र नदी गंभीरी के तट पर स्थित है। गम्भीरी नदी का उद्गम स्थल भी यहीं है। यहां भगवान भोलेनाथ के प्राचीन दो मंदिर हैं। साथ ही हनुमान मंदिर भी है मंदिर के ठीक ऊपर पहाड़ियों में पांच प्राचीन गुफाएं हैं जो श्रद्धालुओं का आकर्षण का केंद्र है साथी भोलेनाथ के मंदिर के आसपास निरंतर जल प्रवाह बहता है जो कभी भी सूखता नहीं है।
मान्यता-
वानरा-खो बहुत ही प्राचीन स्थल है। यहां पर एक कुंड बना हुआ है जो कभी भी सूखता नहीं है। ऐसी ही मान्यता है कि कुंड की मिट्टी को लगाने से चर्म रोग जैसी बीमारियां दूर होती है। भगवान भोलेनाथ पर जल चढ़ाने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है।
गंभीरी नदी पर एक पुस्तक लिखी गई थी गंभीरी की गौरव गाथा जिसमे भी इस स्थान का वर्णन है। इस पुस्तक ने जिले सहित पूरे प्रदेश में खूब सुर्खियां बटोरी थी। गंभीरी की गौरव गाथा के लेखक संजय शर्मा ने बताया है कि अरावली की सुरम्य वादियों में बसा वानर खो एक प्राकृतिक स्थल है। माना जाता है कि इस अंचल में कभी सप्त ऋषियों का आगमन हुआ था यही कारण है कि इस समूची पर्वतमाला में सात प्राकृतिक गुफाएं बनी हुई है यह स्थान मध्य प्रदेश की सीमा में है लेकिन इससे लगा भेरूछज्जा नामक स्थान राजस्थान की सीमा में है, वहां से मात्र 2 किलोमीटर दूर है। इसी से लगा चोरणी गांव है जहां से गंभीरी नदी एक कुंड से प्रकट हुई है गंभीर नदी यहां से चलकर मेहंद्री, मोरवन, सरवानिया, आकलि, नानपुरिया, तारापुर, कीरपुरा से प्रवाह करती हुई केरी गांव राजस्थान से राजस्थान की सीमा में प्रवेश करती है। यहां से आगे का सफर राजस्थान के विभिन्न गांव में प्रवाहित होते हुए चित्तौड़ के समीप संगम महादेव बेडच नदी में मिल जाती है गंभीरी की यह प्रवाह तंत्र लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करता है वानर खो का सौंदर्य अपने आप में मनोहारिणी है।