नीमच। जिले की जावद तहसील के निवासी शौकीन धाकड़ ने मंगलवार दोपहर 1 कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर रतनगढ़ तहसील के लिए आरक्षित भूमि को एसडीएम द्वारा अन्य भू माफियाओं को स्वयं उपस्थित होकर कब्जा दिलाने के मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा। हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन में धाकड़ ने बताया कि रतनगढ़ के समीप ग्राम गुंजालिया में सर्वे क्रमांक 285 की भूमि को लेकर बड़ा घोटाला प्रकाश में आया। रतनगढ नगर से लगी यह भूमि किमती होकर भू-माफिया स्थानीय राजस्व कर्मियों से सांठ-गांठ कर बडी भागीदारी कर भूमि हडपने में सफल हो रहा है।
ग्राम गुजालिया का राजस्व नक्षा न होना, तहसील कर्मियो व भू-माफियों के लिये वरदान सिद्ध हो रहा है। इस भूमि में शासन ने वर्ष 1980 में तीन पट्टे दिये । जिनमें दो पट्टेदार नारू भील व औंकार भील का इस भूमि पर कभी कोई कब्जा नहीं रहा। वर्ष 2001 में नायब तहसीलदार ने सभी पट्टाधारियो की सहमति से बंटाकन स्वीकृत किया जिसका नक्शा 20 समाचार के साथ छाया प्रति के रूप में संलग्न है, किन्तु बंटाकन का नक्षा न होने से अमल दरामद नहीं हो सका। एक पट्टेदार ललिता देवी खत्री का सर्वे क्रमांक 285 के एक भाग पर कब्जा बना रहा। इस बीच रतनगढ़ में तहसील भवन हेतु भूमि प्रस्तावित करने की कार्यवाही के दौरान नायब तहसीलदार महेंद्र सिंह डांगी रतनगढ़ ने सर्वे क्रमाक 285 में से 3.000 हेक्टर भूमि प्रस्तावित की। इस प्रकरण कमांक 338बी 121 / 19-20 में नायब तहसीलदार रतनगढ़ ने विधिवत पटवारी टीम बनाकर राजस्व निरीक्षक से प्रतिवेदन मांगा व भूमि का नक्षा प्रस्तावित किया सभी विभागों की अनुशंसा की गई व प्रस्तावित नक्षे के अनुसार कलेक्टर नीमच ने सर्वे क्रमांक 285 में से तीन हेक्टर भूमि तहसील भवन के लिये आवंटित करने का आदेश 13जुलाई20 को दिया इसका ज्ञान पटवारी नायब तहसीलदार को आरंभ से रहा है।
भू-माफिया की निगाह इस कीमती भूमि पर आरंभ से रही। भू-माफिया ने नायब तहसीलदार ,पटवारी से सांठ-गांठ की व आदिवासी पट्टेदार सत्यनारायण जिसका भूमि के किसी भाग पर कब्जा नहीं था। शासकीय पट्टे की भूमि के तथ्य को छीपाकर, आदिवासी से गैर आदिवासी को विकय की अनुमति दिलाकर तहसील भवन हेतु आवंटित भूमि पर कब्जा करा दिया। इसी तरह पिछले दिनों अनुविभागीय अधिकारी जावद ने खड़े रहकर एक अन्य पट्टेदार औकार भील को तहसील भवन की भूमि पर कब्जा दिलाया। राजस्व कर्मियो ने खुद कलेक्टर नीमच के आवंटन आदेश की धज्जिया उड़ाकर भू-माफियों के हवाले कर दी। आदिवासी पट्टेदारो की आड़ में भू-माफिया के ट्रेक्टर व जेसीबी मशीन चलाकर भूमि पर कब्जा कर लिया गया। करोड़ो रुपये की कीमती भूमि हडपकर “तहसील भवन” के लिये आवंटित आदेश को हवा में उड़ा दिया है। रतनगढ में इस भूमि घोटाले की जबरजस्त चर्चा है। सारा राजस्व महकमा कटघरे में है कि शासन द्वारा आंवटित भूमि सुरक्षित रखने की बजाय भूमि बेचकर भू-माफियों को सौप दी है।
नागरिको की और से कलेक्टर नीमच को मय दस्तावेजो के साथ ज्ञापन सौपा है तथा कलेक्टर नीमच से मांग की है कि वे सर्वे क्रमांक 285 रकबा 3.000 हेक्टर जो तहसील भवन के लिये आरक्षितथ की गई है, से तुरंत अवैध कब्जे हटाये, खेती करने व निर्माण करने से रोके तथा संबंधित राजस्व कर्मियों के विरूद्व तत्काल कड़ी कार्यवाही करे। कलेक्टर ने ज्ञापन लेने व सारी जानकारी से अवगत होने के बाद जिला कलेक्टर में कार्यालय में उपस्थित सिंगोली तहसीलदार रतनगढ़ तहसीलदार प्रभारी राजेंद्र सोनी व नव पदस्थ एसडीएम राजकुमार हलदर को कार्यालय में बुलाकर पूछताछ की ओर निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। इधर शौकीन धाकड़ ने बताया कि उन्होंने ज्ञापन की एक प्रति जनसुनवाई में भी शिकायत दर्ज कराई है उसमें भी राजस्व जावद को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।