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August 2, 2023, 10:35 am
KHABAR : प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की द्वितीय श्रृंखला पर किया प्रेमचंद की कथा साहित्य पर विचार विमर्श, संस्थान की सचिव शर्मा ने कहा- मुंशी जी ने समाज को आदर्श दिशा प्रदान की, पढ़े खबर 

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नीमच। राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान के मार्गदर्शन में प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की द्वितीय श्रृंखला के अंतर्गत प्रेमचंद के कथा साहित्य पर विचार विमर्श किया गया। जिसमें उनके निबंध,आलेख, उपन्यास, पुस्तक-समीक्षा अनुवाद एवं पत्रकारिता आदि  साहित्य पर विचार कर किया गया । संस्थान की सचिव  सुषमा शर्मा ने सभी का स्वागत किया।प्रेमचंद के निर्मला उपन्यास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने समय और समाज को पहचान कर साहित्य सृजन किया जिसमें मानवतावादी स्वर मुखर किए।
संस्था  उपाध्यक्ष डॉ रेखा गुप्ता ने प्रेमचंद के विभिन्न विषयों से संबंधित निबंधों की चर्चा करते हुए बताया कि प्रेमचंद के निबंध समाज की विसंगतियों को बताकर उनका हल खोजने की दिशा में पथ प्रदर्शक का कार्य करते हैं। डॉ सुशीला शर्मा ने संग्राम नाटक में किसानों के संघर्ष का सूक्ष्म विश्लेषण किया।पुष्पा गोस्वामी ने प्रेमचंद के पत्रकार रूप से परिचित कराते हुए उनके सुधारवादी विचारों पर प्रकाश डाला। डॉ पूनम सेठी ने प्रेमचंद के सभी उपन्यासों का संक्षिप्त परिचय दिया। डॉ कंचना सक्सेना ने गोदान उपन्यास को कृषक जीवन का महाकाव्य बताया। डॉ संगीता सक्सेना ने प्रेमचंद के अनुवाद कार्य पर प्रकाश डाला। मनोरमा माथुर ने प्रेमचंद के साहित्य विषयक विचार प्रस्तुत किए।माधवी मुखर्जी ने कहा कि प्रेमचंद ने सामान्य जन की व्यथा का चित्रण एक मनोचिकित्सक के रूप में किया है। आभा सिंह ने प्रेमचंद की आम आदमी के प्रति संवेदनशीलता को रेखांकित किया। अंत में डॉ रेखा गुप्ता ने आज की चर्चा को सफल एवं सार्थक बताते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। और कहा कि इस प्रकार की साहित्यिक चर्चाएं निरंतर होती रहनी चाहिए ।

 

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