इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के विभागों और अस्पतालों में सिर्फ मशीनों की मरम्मत पर ही एक साल में 4 करोड़ रुपए लग चुके हैं। मामले में संभागायुक्त माल सिंह ने विभागाध्यक्षों से मशीनों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी तब खुलासा हुआ कि 33 मशीनें बंद हैं। कई उपकरण भी खराब हैं। इनमें से कुछ तो नॉन-रिपेयरेबल बताए जा रहे हैं। वहीं 8 शिकायतें तो ऐसी हैं जो सात से अधिक दिन बाद भी बनी हुई हैं।
सामान्य रूप से सात दिन के भीतर शिकायतों पर कार्रवाई शुरू हो जानी चाहिए। इन सभी अनियमितताओं के कारण कॉलेज प्रशासन ने कंपनी पर 10 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई है। कंपनी को कॉलेज की 54 करोड़ की मशीनों के रखरखाव का ठेका दिया है। कंपनी ने कुछ समय पहले कॉलेज को 4 करोड़ का बिल दिया था। तब कॉलेज प्रशासन ने रुपयों की कमी का हवाला देते हुए भुगतान नहीं किया था। सूत्रों के मुताबिक अब यह राशि बढ़कर 6 करोड़ से अधिक हो गई है।
हड्डी रोग में सी आर्म सहित 3 मशीनें।
सर्जरी विभाग के 4 मल्टी पैरामॉनिटर्स
वेंटीलेटर और दो बीओडी इन्क्यूबेटर।
रियल टाइम पीसीआर मशीन।
कोल्पोस्कोपी, इलेक्ट्रो कार्डिओग्राफ, सक्शन मशीन बंद।
लंबी खींचतान के बाद इस वर्ष मार्च में डीन ने संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर भुगतान के लिए बजट की मांग की थी। चार महीने बाद भी चिकित्सा शिक्षा विभाग संचालनालय ने राशि जारी नहीं की।