नीमच। मोहर्रम के अवसर पर आयोजित शिया मजलिस में शहीद-ए-कर्बला हज़रत अली असग़र (अ.स.) की शहादत को अत्यंत भावुक माहौल में याद किया गया। मजलिस में ज़ाकिर मौलाना नवाज़िश रज़ा हमीदी ने कर्बला की उस दर्दनाक घटना का उल्लेख किया, जिसे सुनकर अज़ादारों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल ग़मगीन हो उठा।
मौलाना ने बयान किया कि कर्बला के मैदान में जब कई दिनों की प्यास से व्याकुल इमाम हुसैन (अ.स.) अपने छह माह के मासूम बेटे हज़रत अली असग़र (अ.स.) को गोद में लेकर दुश्मनों के सामने पानी की गुहार लगाने पहुंचे, तब रहम करने के बजाय एक ज़ालिम ने तीर चलाकर मासूम बच्चे की गर्दन को निशाना बना दिया। यह हृदयविदारक घटना कर्बला के सबसे मार्मिक प्रसंगों में से एक मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सब्र, सत्य और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का अमर संदेश है। हज़रत अली असग़र (अ.स.) की शहादत आज भी दुनिया को यह सीख देती है कि हक़ और इंसाफ़ की राह में दी गई कुर्बानी कभी व्यर्थ नहीं जाती।
मजलिस के उपरांत हज़रत अली असग़र (अ.स.) की याद में गहवारे (झूले) की शबीह निकाली गई। बड़ी संख्या में अज़ादारों ने श्रद्धा और अकीदत के साथ इसमें शिरकत की तथा अश्कबार आंखों से मासूम शहीद-ए-कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान ग़म, अकीदत और आध्यात्मिक भावनाओं का माहौल बना रहा।