ग्वालियर। भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति (राजस्थान-मध्य प्रदेश) के प्रतिनिधिमंडल ने अफीम खेती नीति 2026-27 को लेकर नारकोटिक्स आयुक्त ग्वालियर दिनेश बिसेन को पांच सूत्रीय सुझाव-पत्र सौंपा। इससे पूर्व समिति द्वारा अपने सुझाव कोटा (राजस्थान) एवं नीमच (मध्य प्रदेश) के उपायुक्तों को भी प्रेषित किए जा चुके हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि अफीम का वर्तमान मूल्य किसानों की लागत और मेहनत के अनुरूप नहीं है। किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए अफीम का समर्थन मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए।
समिति ने सुझाव दिया कि मॉर्फिन प्रतिशत प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है, इसलिए किसानों को इसके आधार पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। किसानों ने मॉर्फिन मानक 3.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक निर्धारित करने तथा एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/29 के प्रावधानों में राहत देने की मांग की।
सुझाव-पत्र में वर्ष 1990 से विभिन्न कारणों से निरस्त किए गए अफीम पट्टों को पुनः बहाल करने और पात्र किसानों को अफीम खेती का एक अवसर देने की मांग भी शामिल है। इसके साथ ही पारिवारिक विवादों को रोकने के लिए अफीम पट्टों का नामांतरण राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप सभी उत्तराधिकारियों के नाम करने का सुझाव दिया गया।
किसानों ने सीपीएस (कंसन्ट्रेट ऑफ पॉपी स्ट्रॉ) पद्धति के माध्यम से निजी कंपनियों की भागीदारी का विरोध करते हुए परंपरागत अफीम खेती को संरक्षण देने की मांग की। उनका कहना है कि अफीम खेती किसानों की आर्थिक सुरक्षा और देशहित से जुड़ा विषय है।
नारकोटिक्स आयुक्त दिनेश बिसेन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना तथा सुझावों को भारत सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने किसानों के सवालों पर विस्तार से चर्चा भी की।
प्रतिनिधिमंडल में संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट, राष्ट्रीय अध्यक्ष भोपाल सिंह चौहान, नाहर सिंह चौहान, कन्हैयालाल मेघवाल, परसराम रावत सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
समिति ने बताया कि अफीम नीति जारी होने से पूर्व प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को भी किसानों के सुझाव सौंपेगा। साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश में बैठकों का आयोजन कर अफीम काश्तकारों को संगठित करने का अभियान चलाया जाएगा।