नीमच। जिला मुख्यालय से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर मनासा तहसील का एक बहुत ही सुंदर और महानगर की तर्ज पर बसा हुआ हुआ सुंदर गांव किसी परिचय का मोहताज नहीं है, आसपास चंबल का पानी और भरपूर लहलहाती फसले, और वहां का भौगोलिक वातावरण अपने आप में उस गांव की सुंदरता को बयां करता है। महानगर की तर्ज पर बसा हुआ यह गांव, आर्थिक समृद्धि, मेहनती किसानो के लिए जाना जाता है जहां गांव में प्रवेश करते ही अपने आप में एक अपनी अलग ही कहानी बयां करता है लेकिन कुछ वर्षों से मानो वहां ग्रहण लग गयातथा वहां पर रह रहे 100 परिवारों में आपसी मतभेद एवं विवाद के चलते 15 और 85 परिवारों में विभक्त हो गया तथा एक बड़ी खाई सी लग गई और समाज दो भागों में बट गया। समय-समय पर एक जुट करने के कई प्रयास हुए लेकिन सफलता हाथ न लगी और यह खाई बढ़ती गई। पर कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है तथा होनी को कौन टाल सकता है, और ईश्वर भी नेक कामों के लिए किसी को भी फरिश्ता बनाकर उस समस्या का हल करने के लिए भेज देता है, और वही हुआ 21 जून की बैठक और और 22 जून की रात्रि 10ः00 बजे सभी समाज जनों की मौजूदगी में खानखेड़ी ब्राह्मण समाज के लिए ऐतिहासिक हुआ तथा सभी के आपसी सामंजस तथा समाज के वरिष्ठ जनों के सफल मार्गदर्शन में आखिरकार समाज एकजुट हुआ पुराने गिले शिकवे भुलाते हुए चारभुजा मंदिर पर सभी ने पुराने मतभेद भूलाते हुए एक जाजम पर बैठकर सभी ने एक स्वर में आपसी प्रेम तथा कार्यक्रमों में सहभागिता निभाने की बात कही।
इन्होंने की सफल पैरवी
समाज को एकजुट करने और एक जाजम पर लाने के लिए नागदा समाज के वरिष्ठ तथा वर्षों पुरानी प्रथा को कायम रखते हुए गांव के पटेल तथा सम्मानित बाबूलाल नागदा नागदा बस, एवं मध्य प्रदेश जोन के उपाध्यक्ष प्रकाश नागदा घसुंडी बामनी ने समाज हित अपने को साबित किया कि समाज के किसी बड़े ओहदे पर बैठने के दौर में किस तरह से समाज में व्याप्त परेशानियों को दूर करना तथा किस तरह से समाज का संपूर्ण विकास हो सके इसका एक शानदार उदाहरण पेश करते हुए लगातार ही 5 दिनों से इस कार्य में लग रहे तथा आखिरकार सफलता हाथ लगी।साथ ही मध्य प्रदेश जोन के मंत्री डबर लाल नागदा, समाजसेवी भागीरथ नागदा बासनिया, डाडम चंद नागदा कानका, गोपाल नागदा अड़मालिया, लक्ष्मीनारायण नागदा रेवली देवली, विष्णु नागदा मनासा, प्रकाश नागदा भादवा माता, जुगल किशोर नागदा, राजू नागदा नागदा बस, बबलू जोशी,किशन लाल नागदा खानखेड़ी, संतोष बाबू, अर्जुन नागदा खानखेड़ी, बाबूलाल नागदा खानखेड़ी, सहीत कई वरिष्ठ एवं गांव के प्रबुद्ध जनों के सहयोग से पुनः एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ तथा आपसी भाईचारा एवं प्रेम का सौहार्द का वातावरण बना।
सामाजिक स्तर के दो गुटों से क्या हो रही थी परेशानी?
गांव में समाज में हो रहे दो गुटों सामाजिक स्तर से कार्यक्रमों में एक दूसरे के यहां आने जाने पर पाबंदी थी जिससे एक गुट का दूसरे गुट में तथा दूसरे गुटका पहले गुट में कई आपसी रिश्तेदारियां थी इसमें कई भाई अपनी बहन , भाई भाई, भाई भतीजा, काका भतीजा,जीजा साला, मां बेटी, मामा भांजा जैसे कई रिश्ते तार तार हो रहे थे तथा आयोजनों में एक दूसरे के यहां पर आना-जाना पूरी तरह निषेध था। अब इस निर्णय के बाद सामाजिक प्रतिबंध खत्म होने से सभी आपसी प्रेम भाईचारे के साथ सभी के यहां आयोजनों में आ जा सकेंगे तथा पुन गांव में एक सामाजिक सौहार्द का वातावरण बनेगा, एवं रिश्तो को मजबूती मिलेगी।