जमुनिया। शासन वल्लभा धर्मरत्न पार्श्व नाथ जैन धर्म स्थली की सुत्र धार साध्वी श्री देवेन्द्र श्री महाराज सा. की प्रथम मासिक पुण्यतिथि पर आयोजित अष्टान्हिका महोत्सव का समापन गुरू गुणानुवाद सभा के साथ हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई स्थानो के लोगो ने गुरू वरिया श्री की अनुशासन धर्म आराधना, कठोर क्रिया एवं स्पष्ट वादी की सभी ने सराहना की तथा कहा कि दिल्ली से लेकर इन्दौर तक के महाराज सा. के चतुर्मास जैन धर्म के लिये किर्ति मान रहे है। धर्म रत्न पार्श्वनाथ जैन साधना स्थली का निर्माण एक माईल स्टोन है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए देवेन्द्र श्री जी महाराज सा. की शिष्या शासन ज्योति श्री जी ने अपनी गुरू वरिया के साथ बिताए 32 सालो को याद कर उनका गुणानुवाद किया उनके बताए मार्ग पर चलने का सकल्प लिया।
इस अवसर पर अनिल नागौरी, प्रेमप्रकाश जैन, सुशील चोधरी (नयागांव), मनीष हिंगड़, महेन्द्र पामेचा (बन्टी) मनीष कोठारी, जितेन्द्र हिंगड़, कमलेश (कालू), अशोक तड़वेचा, रमेश चौधरी, सुरेश पोरवाल, राजेश मानव, जिनेन्द्र डोसी, महेन्द्र पामेचा (मनासा), कुलदीप जी नाहर (उदयपुर), राजेन्द्र बम्बोरिया, नरेन्द्र चोधरी, सुनील पटवा, रुपेशजी नाबरिया (उज्जैन), जितेन्द्र नागोरी (चित्तौड़), बाबुलाल खिंदावत, कमलेश खिंदावत, कमलेशजी (जोधपुर), अनिलजी भण्डारी (उदयपुर), रेखाजी नागोरी (चित्तौड़), लेखारानी हिंगड़, अनिता जी मुरड़िया (दिल्ली) ने अपने विचार रखे । अन्त में आभार प्रेमप्रकाश जैन ने व्यक्त किया।