रतलाम। अतिथि शिक्षक अपना परिवार चलाने में असमर्थ हो रहे है। क्योंकि बीते 5 महीनों से बढ़े हुए मानदेय वाले वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। मौजूदा बीजेपी सरकार केवल लोलीपॉप देकर अपना वोट बटोरने का काम करने के बाद अपने वादे से मुकर जा रही है। अब तक इन शिक्षकों ने कई धरने प्रदर्शन, ज्ञापन तक दे दिए लेकिन बदले केवल नियमितीकरण का लोलीपॉप ही दिया जाता है। इसके बाद सरकार का फिर वो ही ढाक के तीन पात वाला मामला शुरू हो जाता है। अबकी बार इनकी मांगे नही गई तो दोबारा प्रदर्शन शुरू होगा और जिले के सभी अतिथि शिक्षक भूख हड़ताल पर बैठकर अपनी मांगे मनवाने की कोशिश करेंगे। बुधवार को 5 महीनों से रुका वेतन और नियमितीकरण करने सहित अन्य मांगों को लेकर जिला स्तरीय अतिथि शिक्षक संघ के शिक्षक कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
सीएम डॉक्टर मोहन यादव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अतिथि शिक्षकों ने बताया कि 2 सितंबर को भोपाल में महा पंचायत आयोजित हुई थी जिसमें सभी अतिथि शिक्षकों की मांग नियमित कारण को लेकर की गई थी लेकिन आज दिन तक इसका क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री की कई घोषणाएं हैं जो अभी तक अधूरी पड़ी है इस पर किसी तरह का कोई अमल भी नहीं हुआ है जैसे कि एक महीने के मन से मानदेय मिलना चाहिए लेकिन बीते 5 महीना से वेतन ही नहीं दिया गया। बता दें कि इन्हें पिछले 5 महीनों से बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिला और रेगुलर वेतन भी बाकी है। बीते 16 सालों से वे लगातार सेवा दे रहे है। बीते साल 2023 में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा भोपाल में हुई महापंचायत में इनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था। जिसमे बढ़े हुए वेतनमान के साथ विभागीय परीक्षा लेकर शिक्षको का नियमित करने की मांगे थी। शिक्षको की दो मुख्य मांगे है उनका रुका हुआ वेतन मानदेय के साथ दिया जाए और नियमित किया जाए।
यह है और मांगें-
वर्तमान मानदेय वर्ग एक वर्ग दो वर्ग तीन बड़ा हुआ मानदेय अभी तक नहीं मिल रहा है
अतिथि शिक्षकों को उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार हर साल चार और अधिकतम 20 अंक दिए जाएंगे जो अभी तक नहीं मिल रहे हैं।
गुरुजी की तरह यह योजना बनाएंगे जिसमें पात्रता परीक्षा लेकर अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई थी लेकिन घोषणा मात्र घोषणा ही बनकर रह गई।
ज्ञापन देने में दिलीप कटारिया, दशरथ पाटीदार, प्रीति श्रीवास्तव, मुकेश मालवीय, रितेश पालीवाल सहित अन्य शिक्षकगढ़ मौजूद रहे।