सिंगोली। सनातन धर्म में संस्कृति सभ्यता के प्रतीक होली के पावन त्योहार पर पहले कभी नगरवासियों द्वारा शुभ मुहूर्त में हेमरा की लकड़ी गाड़ कर होली के दिन ढोल ढमाको के साथ विशाल भव्य जुलुस के रुप में विद्वान पंडितो के मंत्रौचार के साथ हर्षोंउल्लास से सभी व्यवस्था स्वयं कर जलाई जाती थी लेकिन विगत कुछ वर्षों से सभी व्यवस्थाऐ नगर परिषद द्वारा करके यह रस्म विधिवत बखूबी निभाई जा रही है प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी शुभ मुहूर्त रात्रि 11ः15 पर वार्ड 11 से होलिका दहन शुरू होकर वार्ड 14, वार्ड 6 वार्ड 2 में नगर परिषद द्वारा विधीविधान से नगरवासियों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में गणमान्य जनो से अग्नि प्रच्वलित करा होलिका दहन किया गया रविवार को होली के दिन भद्रा होने की वजह से देर रात्रि 11.15 के बाद शुभ मुहूर्त में होलीका का दहन किया गया। इस दौरान जलती हुई होलीका मे मान्यता अनुसार गेहूं की बालियां भूनकर उसे प्रसाद के रूप में खाने की परंपरा का भी निर्वाहन किया गया साथ ही घरो के चुल्हो में नई अग्नि के रूप में होली के अंगीरे ले जाने की परम्परा भी नगरवासियों ध्दारा की गई होलिका दहन के मौके पर परंपरा के रूप में इसका पालन विशेष तौर पर किया जाता है। होलिका दहन में हेमरा नामक वृक्ष कि एक डाली को जमीन में गाड़कर उसके चारों तरफ से लकड़ी ओर गोबर के कंडे तथा फुलमाला से सजाया जाता है, और फिर शुभ मुहूर्त में पूजा अर्चना कर विधि विधान से होलिका दहन किया जाता है होलिका दहन में सभी ग्रामीण जन एकत्रित होकर बड़े ही उत्साह के साथ भाग लेते हैं तथा बरसों पुरानी परंपरा का निर्वाहन बड़ी ही खुशी और धूमधाम से किया जाता है विशेषकर इस दिन बच्चो में काफी अच्छा उत्साह बना रहता है। छोटे छोटे बच्चे बच्चियाँ गाय के गोबर के डाबुलियो (छोटे कण्डे) की माला सेव परमल फुल माला लेकर उत्साहित हो सनातन सभ्यता संस्कृति के इस पावन त्योहार होलीका दहन में हर्षोंउल्लास के साथ सम्मिलित हुए।