नीमच। मालवा के नीमच में 29 मार्च से अफीम उत्सव प्रारंभ हो गया। नीमच अफीम प्रथम खंड में काले सोने का तौल 29 मार्च से 19 अप्रैल तक नीमच के कनावटी से आगे बनाए गए तौल केंद्र टूरिस्ट मोटल पर किया जा रहा है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नीमच व मंदसौर जिले में अफीम का तोल कर रहा है। इस वर्ष भी अफीम एवं क्षारोद कारखाना ने किसानों की अफीम की गाढ़ता परीक्षण का परिणाम स्पष्ट करने के लिए नई तकनीक अपनाई है। इस तकनीक से किसान भी स्वयं अपनी अफीम की गाढ़ता की स्थिति का पता कर सकते हैं।
कारखाना के जीएम नरेश बुन्देल ने बताया कि पिछले साल की तरह इस साल भी ओपियम कंटेनर ट्रेकिंग एप्लिकेशन यानी ओसीटीए का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें अफीम किसान का कंटेनर जब फैक्ट्री में आएगा तो किसी को पता नहीं चलेगा की इस कंटेनर में किस किसान की अफीम है। यह सॉफ्टवेयर क्यूआर कोड और ब्लॉक चेन आधारित बनाया गया है जो समूची प्रणाली को पूरी तरह से गोपनीय एवं पारदर्शी बनाता है। जीएम बुन्देल ने बताया कि अफीम की सैम्पलिंग का काम चल रहा है। जैसे-जैसे परिणाम आ रहे हैं उन्हें विभाग की वेबसाइट https://goaf.gov.in पर अपलोड किया जा रहा है। काश्तकार स्वयं भी अपनी अफीम की स्थिति को वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। नीमच व मंदसौर डिविजन के 980 किसानों का 31 मार्च का परीक्षण रिजल्ट वेबसाइट https://goaf.gov.in/main/analysis-result पर अपलोड कर दिया है।
गाढ़ता परीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर चलता था सिंडिकेट-
उल्लेखनीय है कि अफीम फैक्ट्री में पहले गाढ़ता परीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर सिंडिकेट ऑपरेट होता था। उसके बाद आईआरएस शशांक यादव का मामला भी इसी फैक्ट्री में उजागर हुआ था, लेकिन जब से इस फैक्ट्री की जीएम आईआरएस अफसर नरेश बुन्देल आए तब से अब तक फैक्ट्री का पूरा प्रशासन ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। पिछली बार भी गाढ़ता परीक्षण के नतीजों में जबरदस्त पारदर्शिता रही और एक भी किसान की कोई शिकायत नहीं मिली। आईआरएस बुन्देल ने फैक्ट्री में चल रहे किसानों को ठगने के पूरे रैकेट को तहस-नहस कर पूरी पारदर्शिता से परीक्षण कार्य करवाया।