रतलाम। जिला कृषि विभाग द्वारा किसानों से कहा गया है कि खेतों में नरवाई नहीं जलाएं। इस संबंध में कलेक्टर राजेश बाथम द्वारा आदेश भी जारी किया गया है कि नरवाई जलाने पर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग ने बताया है कि नरवाई जलाना खेत के लिए आत्मघाती होता है। आग लगने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है, भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के फलस्वरुप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है। भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, आग लगने के कारण पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। भूमि कठोर हो जाती है जिसके कारण भूमि की जलधारण क्षमता कम हो जाती है और फसले सूख जाती है।
खेत की सीमा पर लगे पेड़, पौधे आदि जलकर नष्ट हो जाते हैं, पर्यावरण प्रदूषण होता है, वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है इससे धरती गर्म हो जाती है। कार्बन से नाइट्रोजन व फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है तथा केंचुए नष्ट हो जाते हैं। इस कारण भूमि की उर्वरक क्षमता खत्म हो जाती है। अतः किसानों से कहा गया है कि नरवाई नहीं जलाए।ं खेतों में गेहूं की कटाई के बाद बची हुई नरवाई जलाने पर किसानों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी है।उपसंचालक कृषि नीलम सिंह चौहान ने बताया कि विगत में कुछ सालों से यह देखने में आया है कि गेहूं की 80 प्रतिशत कटाई कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा की जा रही है। हार्वेस्टर से कटाई करने के बाद एक फीट ऊंची गेहूं के डंठल खेत में रह जाते हैं जिससे किसान खेत की सफाई के लिए आग लगाकर जला देते हैं। इसके स्थान पर किसानों को सलाह दी गई है कि गेहूं की डंठलों को रोटावेटर चलाकर बारीक कर सकते हैं। गहरी जुताई करके डंठलों को मिट्टी में मिलावे। जिन किसानों के पास सिंचाई के लिए पानी है वे खेतों में स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी देकर 20 मिलीलीटर डी कंपोजर को 200 लीटर में मिलाकर एक एकड़ में छिड़काव कर सकते हैं।