नीमच। मन में एकाग्रता और पवित्र भाव के बिना आत्म कल्याण का मार्ग नहीं मिलता। यह बात तपागच्छीय प्रवरसमिति कार्यवाहक पूज्य गच्छाधिपति आचार्य भगवंत विजय अभयदेव सूरीश्वरजी महाराज साहब ने कही। वे जैन श्वेतांबर भीडभांजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के तत्वाधान में पुस्तक बाजार स्थित नवीन आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संतो की अमृत वाणी और प्रवचन सुनने के बाद उन पर आत्म चिंतन मनन करना चाहिए और उसे जीवन में आत्मसात करना चाहिए तभी आत्मा का कल्याण हो सकता है।
धर्म सभा में आचार्य श्री व शिष्य रत्न मार्गदर्शक प.पू. आचार्य भगवंत श्री विजय मोक्षरत्न सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा 4 एवं साध्वीजी म.सा. ठाणा 11का सानिध्य भी मिला। श्रीसंघ के वरिष्ठ ट्रस्टीगण मनोहर सिंह लोढ़ा, यशवंत सिंह लोढ़ा एवं सचिव मनीष कोठारी ने विनंती की। गुरुदेव मंगलवार सुबह चल्दु से विहार करके जैन भवन नीमच पहुंचे। श्री जैन श्वेतांबर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट श्री संघ नीमच के तत्वावधान में सामैया जुलूस जैन भवन से प्रारंभ होकर वीर पार्क रोड, कमल चौक, घंटाघर, तिलक मार्ग होते हुए श्री भीड़भंजन पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचे।