श्री महाकालेश्वर की नगरी में डमरू वादन का रिकार्ड बनाने के लिए भगवान महाकाल की तीसरी सवारी निकलने के पहले शक्ति पथ पर करीब 1500 वादक डमरू बजाकर 10 मिनिट प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान विश्व रिकार्ड दर्ज करने वाले अधिकारी भी मौजूद रहेगें। रिकार्ड कायम होने के बाद बाबा महाकाल की सवारी निकलने के पहले विश्व रिकार्ड का प्रमाण पत्र सौंपेगे। इसके बाद बाबा महाकाल की तीसरी सवारी धूूमधाम से शहर भ्रमण पर निकलेगी।
बाबा महाकाल की नगरी में सोमवार को दोपहर 12 बजे भगवान शिव का प्रिय वाद्य यंत्र ढमरू की ध्वनी से श्री महाकाल महालोक का शक्ति पथ गूंजेगा। इस दौरान विश्व रिकार्ड दर्ज करने वाले अधिकारी भी यहां मौजूद रहेगें। करीब 1500 ढमरू वादक बाबा महाकाल की भस्म आरती की थीम पर वादन करेंगे। रिकार्ड बनने के बाद शाम 4 बजे सभी डमरू वादक बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होंगे। वहीं भगवान महाकाल की सवारी निकलने के पहले विश्व रिकार्ड प्रमाण पत्र सौंपेगे। प्रमाण पत्र लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी शामिल हो सकते है। हालांकि अभी तक उनके आने का कोई कार्यक्रम सामने नही आया है, लेकिन संभावना है कि सवारी के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहां पहुंच सकते है।
पांच एलईडी से देख सकेंगे डमरू वादन
सोमवार को होने वाले डमरू वादन के लिए मंदिर प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। डमरू वादक उत्साह के साथ डमरू बजाने की रिहार्सल में जुटे है। वहीं सोमवार को दोपहर 12 बजे महाकाल लोक के समीप शक्ति पथ जहां वर्ल्ड रिकार्ड बनाने का कार्यक्रम होगा वहां पांच एलईडी भी लगाई जा रही है। जिसके माध्यम से डमरू बजाने का नजारा आम लोग भी देख सकेंगे। यही पर एक मंच भी बनाया जा रहा है। यहां वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज करने वाले अधिकारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहेंगे। करीब 10 मिनिट के डमरू वादन के बाद सभी डमरू वादक बाबा महाकाल की सवारी में शामिल हो जाएंगे।
पालकी में चंद्रमौलेश्वर तो रथ पर सवार होगें शिव तांडव
श्री महाकालेश्वर मंदिर से श्रावण के तीसरे सोमवार पर 5 अगस्त को राजाधिराज भगवान महाकाल प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। बाबा महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में चांदी की पालकी तो हाथी पर मनमहेश स्वरूप विराजित होंगे। रथ पर शिव तांडव रूप के दर्शन भी भक्तों को होगें। तीसरी सवारी निकलने के पूर्व सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन होगा। उसके पश्चात भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी जाएगी। उसके बाद सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाडी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी। जहां मां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन करने के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुनरू श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी। श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी का सजीव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के फेसबुक पर व सवारी के अंत मे चलित रथ में एलईडी के माध्यम से भी होगें।