चीताखेड़ा। लोकतंत्र के नाम पर जिनको विकास का जिम्मा दिया दो साल में ऐसी कोई जनहित में जनता को उपलब्धि नहीं दे पाए। सरपंच प्रतिनिधि तो अहंकार में डूबा हुआ है जो कभी किसी नागरिक से सीधे मुंह बात तक नहीं करता। अभी भी चुनावी रंजिश पाल रहा है। पंचायत में बैठे अन्य जनप्रतिनिधि भी हिटलर शाही तंत्र बन कर रह गए। पंचायत की बैठक में ग्राम पंचायत को टाइम पास और चाय,कचोरी की होटल बना कर रख दिया और अपना समय व्यतीत करके जनप्रतिनिधि ग्राम पंचायत से जुड़े लोग स्वयं बादशाह बन गए हैं। कुछ पंचों ने दबी जुबान से कहा कि क्या करें, सरपंच प्रतिनिधि हमारी आवाज को दबा कर रख देता है।
इस क्षेत्र में टाइम पास करने का शायद ही कोई दूसरा उदाहरण मिले। इस ग्राम पंचायत को गठित हुए दो साल का समय बीत चुका है।पर अपने दो वर्ष के कार्यकाल में ऐसी कोई जनहित में बड़ी उपलब्धि साबित नहीं कर पाए। गांव में ऐसी कई कालोनियां , गली, मौहल्ले ऐसे हैं जहां एक साधारण कार्य नालियां, गटर तथा सीमेंट कांक्रीट या फर्सीकरण वर्षों से नहीं है घरों से शोचालय से बहने वाला गंदा और बारिश का पानी आम रास्ते के बीच बहता है जिससे राहगीरों को आवागमन में भारी असुविधा से गुजरना पड़ता है। जहां तक किआधिक तर स्टेट लाइट खंबों पर बल्ब वेपरलेंप तक नहीं है कई गली मौहल्ले तो शाम ढलते ही अंधेरा गूप हो जाता है। जिससे राहगीरों को अंधेरे में मोबाइल की बेट्री से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड रहा है। इससे सुंदर सपना लोकतंत्र का क्या हो सकता है। बरसात के कारण जान लेवा जहरीले जानवर इधर-उधर रेंगते रहते हैं लोगों में भय बना हुआ है।
नेताओं -कर्मचारियों का गिरोह बन गया है। सरपंच और प्रतिनिधि तथा कुछ पंच जैसे नाम तो मीडिया में तैर रहे हैं। अधिकारी कृपालु होते हैं जनपद हो या जिला पंचायत आंखें मूंद लेता है । दादागिरी के माहौल में जनता गुलाम होती है बारिश में कई आम रास्ते ऐसे हैं जिनमें आवागमन ही अवरुद्ध हो जाता है। गांव का भोला भाला व्यक्ति किसी छोटे मोटे प्रमाण पत्र के लिए हस्ताक्षर के लिए जाता है तो आवेदक से आवेदन लेकर एक डिब्बे में फेंक दिया जाता है और आंखें लाल पीली करके जवाब देते दो दिन बाद ले जाना ,सभी को एक ही जवाब दिया जाता है। पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधि स्वयं अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए है। इनसे पूर्व में भी जो भी थे आज उसको भी कोई नहीं पूछता तो ये कौन-से खेत की मूली हैं। समय आया और मिला है तो कुछ अच्छा करके दिखाओ तो पीढ़ी दर पीढ़ी याद करेंगी। नहीं तो बारिश के जोर से निकले पंख वाले मकोड़े कुछ नहीं बाद अपना अस्तित्व ही समाप्त कर लेते हैं। बरसात का समय है कई गली मौहल्लों में साफ-सफाई के अभाव में कचरे के ढेर पड़े हुए हैं गंदगी बदबू मार रही है जिससे रहवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। गांव में अभी भी कई आम रास्ते ऐसे हैं जिनमें बड़े बड़े गड्ढे पड़े हुए हैं गड्ढों में बरसात का पानी, किचड़ भरा हुआ है जिससे राहगीरों को आवागमन में भारी असुविधा हो रही है। वहीं चांदनी चौक में सरपंच के रिश्ते दार अशोक कुमार जैन मंत्री का प्लाट में सांप बिच्छू का घर बना हुआ है।