चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने बताया कि इस संसार में क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कषाय मानव मात्र के अंदर मौजूद है जिसकी वजह से एक दूसरे के प्रति मन में कलुषित भावनाएं पैदा होती है जो स्वयं को ऊंचा और दूसरों को नीचा मानने लगती है जिससे विषमता पूर्ण वातावरण बनता है जो आगे चल कर परिवार और समाज में कलह का कारण बनता है। मानव के अंदर कषाय होना उसकी प्रकृति है परन्तु कषाय करना उसकी सबसे बड़ी विकृति है जिस पर हमें नियंत्रण करने की कोशिश करते रहना चाहिए जिससे धीरे धीरे हमें आत्म स्वरूप का अहसास हो सकेगा जो हमें मुक्ति मार्ग पर आगे बढ़ाएगा। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि प्रभु महावीर ने हम सबको आगमवाणी रूपी खज़ाने से मालामाल बनाया है ,हम इस पर पूरी श्रद्धा और विश्वास रख कर इसको अपने आचरण में लाएंगे तो हम भी महावीर बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे। साध्वीरत्ना राजश्री जी म सा ने सुरभि मोदी को सात उपवास एवम् प्रेमबाई सरुपरिया को 3 उपवास तथा अन्य प्रत्याख्यान् ग्रहण कराए। सभी उपस्थित जनों द्वारा तपस्या की खूब खूब अनुमोदना की गई। आज़ की धर्म सभा में कानोड़ संघ बालिका मण्डल के साथ उपस्थित रहा। अनिल बाबेल एवम् प्रिंसी भाणावत ने विचार व्यक्त किए। संचालन पारस सोनी ने किया।