नीमच। मानव जीवन में जितने भी दुःख हैं उनका मूल कारण लोभ है। लोभ के कारण ही हम घर परिवार धन दौलत के चक्कर में फंसे रहते हैं जो लोग लोभ की प्रवृति रखते हैं वह जीवन भर उससे निकल नहीं पाते हैं और लोभ में ही अपना जीवन पूरा कर देते हैं। हम दुःख के कारण लोभ को छोड़ें और भक्ति धर्म को अपनाए। यह बात साध्वी सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही।वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर श्री संघ के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय विकास नगर आराधना भवन नीमच में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि जीवन में लोभ मत करो ,लोभ ही दुःख का कारण है। ज्ञानीजन लोभ को ही दुःख का कारण मानते हैं और लोभ से दूर रहने की सीख भी देते हैं। धन के प्रति आसक्ति मनुष्य का अगला जन्म बिगाड़ देती है। जीवन में यदि आत्म सुख पाना है तो लोभ की प्रवृत्ति छोड़ो और भक्ति धर्म को अपनाओ जो धन आपके पास है उसमें संतुष्ट रहने का प्रयास करें। अधिक धन कमाने और प्राप्त करने की लालसा में वर्तमान समय को खराब मत करो ।धन की लालसा सुख नहीं केवल दुःख देती है। धन के प्रति आसक्ति का त्याग करके हम अपने वर्तमान जीवन को सुखी समृद्ध बना सकते हैं। भगवान पार्श्वनाथ भगवान श्रद्धा का केंद्र है पालीताणा तीर्थ दर्शन कर मोक्ष की प्रार्थना की जाती है। संसार के सभी लोग मोक्ष चाहते हैं लेकिन भगवान से सोने चांदी की मांग करते हैं चिंतन का विषय है। हम सब संसार छोड़ना चाहते हैं भगवान ने स्वयं संसार छोड़ दिया फिर हम उनसे संसार के भौतिक सुखों की मांग क्यों करते हैं चिन्तन का विषय है। आत्मा देने वाले हैं लेकिन पुण्य का बैंक मजबूत है तो मिल सकता है। यह तो अधिष्टाय देव भक्त हमारे कष्ट दूर करते हैं। हम भूल कर भी जीवन का पाप नहीं करें नहीं तो दुरगति में ले जाने का कारण बनते हैं। भगवान की भक्ति करे तो पुण्य एकत्र होता है। कर्म जीवन में आत्मा से जुड़े रहते हैं। आयुष कर्म एक बार बनता है जो जीवन पर्यन्त साथ रहता है।
पार्श्वनाथ मोक्ष निर्वाण का लाडू चढ़ाया-
पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया गया जिसमें निर्वाण के लड्डू चढ़ाने की बोली लगाई गई जिसमें समाज जनों ने उत्साह के साथ भाग लिया निर्वाण के लाडू चढ़ाने की बोली का धर्म लाभ मोहनलाल, महावीर, आशीष सुराणा परिवार ने लिया। इस अवसर पर बाजे गाजे के साथ निर्वाण के लड्डू का शोभायात्रा विकास नगर के प्रमुख मार्गाे से निकल गई और मंदिर में पहुंचकर निर्वाण का लाडू चढ़कर सभी ने आशीर्वाद ग्रहण किया। इस अवसर पर महावीर जिनालय अध्यक्ष राकेश जैन आंचलिया सुंदर तांतेड ,राजमल छाजेड़ ,राजेंद्र बंबोरिया ,मुकेश चोपड़ा ,राहुल जैन, चंद्रलेखा बेगानी ,स्नेह लता तांतेड प्रीति नपावलिया उपस्थित थे
इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक तपस्या उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्रारंभ हो गया है।