नीमच। गौ सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता है। गौ सेवा का फल पुण्य दायी होता है। गौ सेवा मुक प्राणियों की सबसे बड़ी सेवा होती है। सेवा का पुण्य कभी निष्फल नहीं जाता है यह सदैव जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी साथ रहता है। गौ सेवा का पुण्य संसार में सबसे ऊंचा होता है गौ सेवा करने से जो संतुष्टि आत्मा को मिलती है वह संसार में किसी भी कार्य से नहीं मिलती है।
यह बात आचार्य जिन सुंदर सुरी श्री जी महाराज ने कहीं ।वे जैन श्वेतांबर श्री भीड़ भंजन पार्श्वनाथ मंदिर श्री संघ ट्रस्ट पुस्तक बाजार के तत्वावधान में मिडिल स्कूल मैदान स्थित जैन भवन में आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में धन का सदुपयोग करना हो तो गौ सेवा करनी चाहिए। यह पुण्य सदैव साथ रहता है ।धन संपत्ति सब यहीं रह जाते हैं।
नगर में पहली बार नीमच के जैन समाज जनों द्वारा सभी 500 घरों से रोटी और गुड़ एकत्र कर नीमच क्षेत्र की विभिन्न गौशालाओं में गौ माता के आहार के लिए प्रेषित किया जा रहा है जो अनुकरणीय सेवा कार्य है। यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।पूज्य आचार्य भगवंत श्री जिनसुंदर सुरिजी मसा, धर्म बोधी सुरी श्री जी महाराज आदि ठाणा 8 का सानिध्य मिला। प्रवचन एवं धर्मसभा हुई। प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे प्रवचन करने के व साध्वी वृंद के दर्शन वंदन का लाभ नीमच नगर वासियों को मिला प्रवचन का धर्म लाभ लिया।