कसरावद। इस्लामी कैलेंडर के दूसरे महीने की जुम्मे को 09 तारीख हो गई। इसी के साथ माहौल अब नवासा-ए-रसूल ज़िक्रे इमाम हुसैन की अकीदत में डूबने लगा है। मजलिस, जुलूस के साथ ही अब जलसों का सिलसिला भी हुआ। जलसा-ए-जिक्रे इमाम हुसैन की शहादत से मोहल्लो में शहादत की शदा गुंजी मस्जिदों में भी कर्बला की शहादत का जिक्र चल रहा है। इस्लाम धर्म में शहादत का जज्बा बड़ा मर्तबा रखता है। जिसकी बदौलत इस्लाम को रहती दुनिया तक ताजगी मिलती रहेगी। और उनके द्वारा कहा गया की मे हुसैन से और हुसैन मुझ से है कार्यक्रम जामा मस्जिद चौक कसरावद में हुआ कार्यक्रम के आयोजन के मुख्य एडवोकेट आयशा पठान, अफजल खान और शहर सदर रईस कुरैशी, तस्लीम खान, मुजाहिद खान, अबरार पठान पत्रकार, अब्दुल्ला पठान, मुफीद खान, बब्बू खान, रिजवान खान ने अतिथियों का इस्तकबाल किया।
सूफी मोहम्मद सैफुल्लाह कादरी साहब किब्ला की कांफ्रेंस
आशिकाने आला हजरत की तरफ से मोहल्ला सूफी मोहम्मद सैफुल्लाह कादरी साहब किब्ला ने जिक्र इमाम हुसैन की कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जा नशीन नईम अख्तर इमाम की शदारत वाली कांफ्रेंस का आगाज तिलावते कलाम पाक से हुआ।