जबलपुर। दूरसंचार विभाग अपनी अरबों रुपए की जमीन को बेचने की तैयारी कर रहा है, विभाग ने इसके लिए निविदा भी जारी कर दी है। जबलपुर शहर के बीच में स्थित करीब 70 एकड़ की जमीन को जैसे ही बेचने की जानकारी जबलपुर वासियों को लगी तो इस जमीन को बचाने के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। दूरसंचार विभाग की 70 एकड़ जमीन में करीब 20 हजार वृक्ष लगे हुए हैं, इस जमीन को बेचने के बाद यहां लगे वृक्षों को काटकर हरियाली समाप्त कर दी जाएगी, लिहाजा इसको लेकर जबलपुर शहर के कई सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन की लड़ाई छेड़ दी है। रक्षाबंधन के ठीक 1 दिन पहले इस जमीन में लगे वृक्षों में स्थानीय लोगों ने राखी बांधकर अपील की है कि सरकार ना ही इस जमीन को बेचे और ना ही यहां पर लगे पेड़ को काटा जाए।
दरअसल, जबलपुर स्नेह नगर में बीएसएनएल टेलीकॉम फैक्ट्री है जो कि कई साल पहले बंद हो चुकी है। फैक्ट्री की 70 एकड़ जमीन जंगल से भरा हुआ है, यहां पर छोटे-छोटे जीव जंतु सहित कई प्रजाति के पक्षी भी है। बीच शहर में स्थित जंगल की हरियाली देखते ही बनती है, यही कारण है कि लोग सुबह-शाम यहां घूमने आते है। स्थानीय लोगों को जानकारी लगी कि केन्द्र सरकार ने बीच शहर में स्थित कीमती जमीन को बेचने की तैयारी कर ली है। स्थानीय लोगों ने 20 हजार पेड़ों वाले जंगल को बचाने की शुरुआत करते हुए आंदोलन किए, इस बीच सरकार की कवायद भी चलती रही और जमीन बेचने की निविदा भी जारी कर दी गई। टेलीकाम फैक्ट्री में फैली हरियाली इस कदर लोगों को प्रभावित करती है कि लोग इसे ऑक्सीजन बैंक भी कहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह जमीन बिक जाएगी तो वन को काटते हुए यहां पर व्यवसायिक उपयोग होगा, जिसके चलते 20 हजार पेड़ काटे जाएंगे। वर्तमान में बंद टेलीकॉम फैक्ट्री ऑक्सीजन बैंक बन गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस जमीन को सहेजते हुए नेचुरल प्लेस बनाना चाहिए।
जबलपुर शहर के ऑक्सीजन सेंटर को बचाने के लिए लोग आज अपने-अपने घरों से बाहर निकले और टेलीकॉम फैक्ट्री के उस जंगल में पहुंचे जहां हजारो पेड़ लगे हुए है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग, और महिलाओं ने पेड़ में राखी बांधी और सरकार ने अपील की है कि इस जमीन को बेचने की वजह इसे एक पार्क के रूप में विकसित करें। श्श् सेव जबलपुर लग्सश्श् नाम के ग्रुप में जुड़े सैकड़ों लोगों ने बड़ी-बड़ी राखी लेकर टेलीकॉम फैक्ट्री पहुंचे और राखी बांधी। इस ग्रुप के संयोजक डॉक्टर पवन स्थापक ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए सरकार एक पेड़ मां के नाम का अभियान चल रही है, वहीं दूसरी शहर के बीच में स्थित एक घने जंगल को काटने की तैयारी चल रही है, अगर ये वृक्ष कट जाएंगे तो शहर का ऑक्सीजन सेंटर खत्म हो जाएगा, और जल के स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा। डॉक्टर पवन स्थापक ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि बीएसएनएल की फैक्ट्री के अंदर जो ऑक्सीजन बैंक है, उसे बचाकर रखें नहीं तो आने वाले समय में एयर क्वालिटी इंडेक्स और खराब हो जाएगा। उन्होंने मांग की है कि इस जंगल को इको पार्क के रूप में सरकार विकसित करें।
श्श् सेव जबलपुर लंग्स श्श् के तत्वाधान में टेलीकॉम फैक्ट्री पहुंचे लोगों ने पेड़ में राखी बांधी और इसे बचाकर रखने की मांग की है। जबलपुर निवासी मोनिका का कहना है कि एक पेड़ को तैयार होने में सालों लग जाते है, पर उसे काटने में चंद घंटे लगते है, ये वही पेड़ है जो कि हमें ऑक्सीजन देते है, और पर्यावरण को संतुलित भी रखते है, इसलिए शहर के बीच में स्थित इस प्राकृतिक जंगल को बचाने के लिए सभी लोगों को आगे आना चाहिए। करीब 20 किलोमीटर दूर से टेलीकॉम फैक्ट्री पहुंची बुजुर्ग महिला ने बताया कि जैसे ही मुझे जानकारी लगी कि वृक्ष बचाने के लिए यहां पर कार्यक्रम हो रहा है, और राखी बांधी जा रही है, तो मैं भी यहां पर आई हूं, और राखी बांधकर मांग करती है कि सरकार इन पेड़ों को न काटे।
टेलीकॉम फैक्ट्री को बचाने के लिए शहर के नागरिक उपभोक्ता मंच ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता रजत भार्गव ने बताया कि बीच शहर में छोटा वन तैयार हो चुका है, जहां हजारों पेड़ लगे है जिसमें कई तरह के पशु-पक्षी वास करते हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि अगर यह जमीन बिक जाएगी तो वन को काटते हुए यहां पर व्यवसायिक उपयोग होगा, जिसके चलते 20 हजार पेड़ काटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस मामले में सुनवाई होगी और हमें उम्मीद है कि न्यायालय पर्यावरण को देखते हुए हमारे हक में ही फैसला देगा।