चीताखेड़ा। प्रदेश और केंद्र सरकार की डबल इंजन सरकार की उन्नत सड़कें जो मुख्यमंत्री बात करते हैं सड़कों के मामले में सबसे धनाढ्य प्रदेश और गुणवत्ता नियंत्रण करने पर विशेष फोकस की और यातायात व्यवस्था का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर विश्लेषण, नक्शे पर प्रदर्शन और वार्षिक कार्ययोजना बनाने के लिए ऐसेट मैनेजमेंट सिस्टम की स्थापना की। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ रही है। नीमच विधानसभा क्षेत्र के चीताखेड़ा से गमेरपुरा तथा चीताखेड़ा से रंभावली पहूंच मार्ग पर सड़कों की दुर्दशा की,सड़क पर गड्ढे कहें या गड्ढों में सड़क। गमेरपुरा, गांधीपुरा,देवीयां ग्वाल, खंडेलिया गांव की जनता आज भी देश की 78 वीं आजादी के बाद भी डामरीकरण सड़क मार्ग के लिए तरस रही है।
स्वच्छ, स्वस्थ, सुदृढ़ और सुरक्षित सड़कों के माध्यम से आर्थिक रूप से समृद्ध प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने की। चीताखेड़ा से गमेरपुरा पहुंच मार्ग की इतनी दयनीय स्थिति हो गई है कि वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। विगत कुछ दिनों पूर्व नाम मात्र का मोहरमीकरण कार्य किया गया था। जिसमें भी पंचायत द्वारा लिपापोती कर दी गई आज भी यह मार्ग बरसात के कारण दयनीय स्थिति में है।वहीं कराड़िया महाराज से देवियां ग्वाल-राबडिया और हरनावदा से राबडिया तक पहुंच मार्ग विगत कई वर्षों से चर्चा में रहा है और विधायक द्वारा भी कई बार घोषणाएं भी करते रहे हैं परन्तु आज तक इस मार्ग पर कोई तवज्जो नहीं दी गई है।भोपतपुरा से गांधीपुरा तक,बरकटी से जामनगर तक ,पिपलिया जागीर से खंडेलिया तक, बरकटी से घसुंडी जागीर तक आज भी वहां की जनता देश की 78 वीं आजादी के बाद भी डामरीकरण सड़क के लिए तरस रही है। समय समय पर घोषणा वीर विधायक सिर्फ घोषणा ही कर जनता को गुमराह करते रहे हैं। लेकिन इनके 11 सालों के विधायकीय कार्य काल में कुछ नहीं करवा पाएं घोषणा के सिवाय। विधायक अपने विधायकीय 11 सालों में विकास के लिए कृत संकल्पित ज़रुर रहे हैं। अगर शिक्षा के क्षेत्र की बात करें तो चीताखेड़ा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विगत 11 सालों से भी अधिक समय से शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। धार्मिक क्षेत्र की बात करें तो माली मौहल्ले में शिव मंदिर पर छत निर्माण कार्य हेतु डेढ़ लाख रुपए घोषणा करते हुए शिलान्यास एवं भूमिपूजन किया गया था परन्तु आज तक कुछ नहीं हुआ। शिलान्यास पट्टिका पर स्वान लघुशंका कर रहे हैं।चीताखेड़ा से नीमच पहुंच मार्ग पर महुडिया और धामनिया बस स्टैंड पर तथा चीताखेड़ा से जीरन पहुंच सड़क मार्ग की दुर्दशा किसी से छुपी हुई नहीं है।