उज्जैन। आगामी 6 सितंबर को देश भर में गणेश चतुर्थी के पर्व की शुरुआत होगी। प्रति वर्ष की तरह इस बार भी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लोकमान्य गणेश उत्सव समिति द्वारा नलिया बाखल क्षेत्र में भगवान गणेश की प्रतिमा मिट्टी से बनाने के लिए कार्यशाला की शुरुआत हुई। जिसमें उज्जैन कलेक्टर एसपी सहित कई लोग शामिल हुए।
विगत 10 वर्षों से मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को बनाए जाने का कार्य लोकमान्य गणेश उत्सव समिति द्वारा किया जा रहा है। मिट्टी से बनी प्रतिमा पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल है। समिति के सहसंयोजक जगदीश पांचाल ने कहा कि गणेश उत्सव पर अपने घरों में मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा ही विराजित करें। उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने मिटटी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा को देखकर कहा कि शासन के नीति निर्देशों के तहत मूर्तिकारों को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
दरअसल मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश जी की मूर्ति की पूजन का ही धार्मिक महत्व होने के साथ ही पर्यावरण की द्रष्टि से भी यह बहुत ही आवश्यक है। आज पुरा विश्व ग्लोबल वार्मिग और पर्यावरण संतुलन को लेकर चिंता में है तो हमारी भी यह जिम्मेदारी है कि पर्यावरण संतुलन मे अपना दायित्व और धर्म निभाएं। इस अवसर पर नगर निगम सभापति कलावती यादव, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा उपस्थित रहें।
कलेक्टर एसपी ने मूर्तियों पर किया कलर -
कलेक्टर नीरज सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कार्यशाला में मूर्तिकारों द्वारा बनाई गई गणेश प्रतिमाओं का अवलोकन किया और उनके कौशल और कला की सराहना की। कलेक्टर एसपी ने मूर्तियों पर पेंटिंग कर मूर्तिकारों का उत्साहवर्धन भी किया।
समिति ने कहा अपने हाथों से मूर्ति बनाकर साथ ले जाए -
लोकमान्य तिलक महाआयोजन समिती उज्जैन लगातार इस धार्मिक आयोजन को पूरे उत्साह से मनाता है। हम श्रद्धालुओ से अपील करते हैं कि वह भी इस बार अपने घर पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मिट्टी से बनी मुर्तियां ही बैठाएं और हमारी कार्यशाला में आएं और अपने हाथों से गणेश जी बनाकर अपने घर ले जाए और पुजन हेतु विराजमान कराएं। इस हेतु आयोजन समिति के सहसंयोजक जगदीश पांचाल से उनके मोबाइल फोन नं 9144193399 पर संपर्क कर सकते हैं।