मंदसौर। गांधीसागर अभयारण्य में स्थित चारागाह क्षेत्रों के प्रबंधन एवं चारागाह क्षेत्रों की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के सेवा निवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चारागाह विशेषज्ञ डॉ आर. के. पांडेय, वन विभाग में मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवा निवृत्त चारागाह एवं वन्य प्राणी विशेषज्ञ रवि कांत मिश्रा द्वारा अभयारण्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चारागाह क्षेत्रों के समुचित प्रबंधन हेतु प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान वन मंडल अधिकारी संजय रायखेरे, अधीक्षक गांधीसगर अभयारण्य, वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं समस्त स्टाफ उपस्थित था।
प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चारागाह विशेषज्ञ डॉ आर. के. पांडेय द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि चारागाह विकास एवं उनका प्रबंधन, वन्य प्राणी प्रबंधन का एक अभिन्न अंग है। किसी भी जीव को जीवन व्यापन के लिए मुख्य रूप से - भोजन, पानी एवं आवास की आवश्यकता होती हैं। घने जंगल आवास के लिए, बहती नदियां, तालाब पानी के लिए और घांस के मैदान भोजन के लिए। ये तीनों मिलकर वन्य प्राणी प्रबंधन के उद्देश्य को पूर्ण करते है। घांस के मैदान जिनके बारे में सबसे कम सोचा जाता है या जो सबसे अधिक जैविक दबाव झेल रहे है, चाहे वह अतिक्रमण का दबाव हो या अवैध चराई का बहुत कम चर्चा के विषय होते है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन्य प्राणियों हेतु खाने योग्य एवं नहीं खाने योग्य घांस प्रजाति की पहचान करना, चारागाह क्षेत्रों में पाए जाने वाले खरपतवारों की पहचान कर उनका समूल उन्मूलन, चारागाह क्षेत्रों के प्रबंधन हेतु सूक्ष्म प्रबन्ध योजना का निर्माण तथा चारागाह क्षेत्रों में खाने योग्य घांस प्रजाति व जंगली दलहनी फसलों की मात्रा को बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण दिया गया।