BREAKING NEWS
NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     KHABAR : एनएसयूआई कार्यकर्ता के दुष्कर्म मामले.. <<     BIG REPORT : नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के तहत नीमच.. <<     KHABAR : ग्रामीण विकास कार्यों में लापरवाही नहीं.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     NEWS : हरियाली अमावस्या पर गूंजेगा शौर्य का.. <<     BIG NEWS : मिनी पुरी बना नीमच, फूलों से सजे दिव्य रथ.. <<     NEWS : एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ीं जिला.. <<     NEWS : श्री महावीर जैन मण्डल संस्थान की नई.. <<     NEWS : भारत विकास परिषद की उत्कर्ष शाखा का गठन,.. <<     NEWS : श्रृंग ऋषि जयंती पर प्रतिभाओं का महाकुंभ, 80.. <<     NEWS : न्युवोको विस्टास की दमदार शुरुआत, पहली.. <<     NEWS : हाईवे पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 25 अवैध.. <<     REPORT : कुपोषण मुक्त नीमच के लिए कलेक्टर हिमांशु.. <<     KHABAR : नराकास की बैठक में गूंजी हिंदी की आवाज,.. <<     KHABAR : लखपति दीदी बनेगी आत्मनिर्भरता की नई.. <<     BIG NEWS : दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का दर्द.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
August 31, 2024, 12:34 pm
KHABAR : वन्यजीव रहवास विकास एवं पेयजल प्रबंधन के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन, उपस्थितों को मिला विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, पढ़े खबर 

Share On:-

मंदसौर। गांधीसागर अभयारण्य में स्थित चारागाह क्षेत्रों के प्रबंधन एवं चारागाह क्षेत्रों की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के सेवा निवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चारागाह विशेषज्ञ डॉ आर. के. पांडेय, वन विभाग में मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवा निवृत्त चारागाह एवं वन्य प्राणी विशेषज्ञ रवि कांत मिश्रा द्वारा अभयारण्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चारागाह क्षेत्रों के समुचित प्रबंधन हेतु प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान वन मंडल अधिकारी संजय रायखेरे, अधीक्षक गांधीसगर अभयारण्य, वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं समस्त स्टाफ उपस्थित था।

प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चारागाह विशेषज्ञ डॉ आर. के. पांडेय द्वारा जानकारी देते हुए बताया कि चारागाह विकास एवं उनका प्रबंधन, वन्य प्राणी प्रबंधन का एक अभिन्न अंग है। किसी भी जीव को जीवन व्यापन के लिए मुख्य रूप से - भोजन, पानी एवं आवास की आवश्यकता होती हैं। घने जंगल आवास के लिए, बहती नदियां, तालाब पानी के लिए और घांस के मैदान भोजन के लिए। ये तीनों मिलकर वन्य प्राणी प्रबंधन के उद्देश्य को पूर्ण करते है। घांस के मैदान जिनके बारे में सबसे कम सोचा जाता है या जो सबसे अधिक जैविक दबाव झेल रहे है, चाहे वह अतिक्रमण का दबाव हो या अवैध चराई का बहुत कम चर्चा के विषय होते है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन्य प्राणियों हेतु खाने योग्य एवं नहीं खाने योग्य घांस प्रजाति की पहचान करना, चारागाह क्षेत्रों में पाए जाने वाले खरपतवारों की पहचान कर उनका समूल उन्मूलन, चारागाह क्षेत्रों के प्रबंधन हेतु सूक्ष्म प्रबन्ध योजना का निर्माण तथा चारागाह क्षेत्रों में खाने योग्य घांस प्रजाति व जंगली दलहनी फसलों की मात्रा को बढ़ाने हेतु प्रशिक्षण दिया गया।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE