जबलपुर। एक निजी अस्पताल में 8 अगस्त 2022 को अग्निकांड हुआ था जिसमें कि 8 व्यक्तियों की मौत हुई थी। घटना की जाँच से जुड़े कुछ दस्तावेज को लेकर जबलपुर के अधिवक्ता विशाल बघेल ने सूचना के अधिकार के तहत मंत्रालय वल्लभ भवन स्वास्थ्य विभाग में एक आवेदन सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत 13 जून 2023 को ऑनलाइन दाखिल किया था, जिसमें जबलपुर में हुए न्यू लाइफ अस्पताल अग्निकांड में संभागायुक्त की कमेटी से कराई गई जांच की रिपोर्ट की कॉपी मांगी गई थी, जिसकी जानकारी आवेदक को नहीं दी गई। इसके बाद प्रथम अपील 28 जुलाई 2023 को फिर द्वितीय अपील 21 सितंबर 2023 को राज्य सूचना आयोग के पास लगाई गई, वहां पर भी एक साल से राज्य सूचना आयोग ने अपील का निपटारा नहीं किया है।
याचिकाकर्ता विशाल बघेल के आरटीआई आवेदन पर मंत्रालय द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई जिसके चलते, आवेदक ने अधिनियम की धारा 19 के तहत प्रथम अपील मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी को पेश की किंतु अधिकारियों द्वारा प्रथम अपील की भी सुनवाई नहीं की गई। और जब उनके ख़िलाफ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष पेश की गई तो उनके द्वारा विशाल बघेल की अपील का निराकरण लगभग 1 साल से नहीं किया गया , जबकि मध्य प्रदेश सूचना का अधिकार फीस तथा अपील नियम 2005 के अनुसार दूसरी अपील का निराकरण 180 दिनों में किया जाना अनिवार्य है।
अधिवक्ता विशाल बघेल ने 28 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि अपील का निराकरण इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में वर्तमान में एक भी आयुक्त कार्यतर्त नहीं है, और पूरे आयोग का कामकाज 5 माह से एक भी सूचना आयुक्त ना होने से बंद पड़ा है, जिससे अपीलार्थी परेशान हो रहे हैं और हजारों अपील पेंडिंग हैं।
मामले पर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह के अंदर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई अब 23 सितंबर को करने के निर्देश दिए हैं। बता दे कि मध्यप्रदेश में राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के 10 पद स्वीकृत हैं लेकिन सभी पदों पर नियुक्त आयुक्त के सेवानिवृत हो जाने के बाद सरकार द्वारा नियुक्ति नहीं की जा रही है, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष पिछले 3 सालों में 3 बार विज्ञापन जारी कर सूचना आयुक्त के पदों पर आवेदन मंगाए थे, लेकिन नियुक्तियां नही की गई , जिससे राज्य सूचना आयोग अब ठप्प पड गया है। गौरतलब है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 15 के प्रावधान अनुसार राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा की जाती है जिसमे नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक अन्य केबिनेट मंत्री भी समिति में शामिल होते हैं