खाचरोद। मप्र सरकार द्वारा शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन उनका सही क्रियान्वयन नहीं होने से शासकीय स्कूलों में मासुम बच्चों का वर्तमान और भविष्य दोनों अधर में लटक रहा है। हम बात कर रहे खाचरोद ब्लाक के शासकीय शिक्षा मंदिरों की जो जर्जर हालत में अपनी दास्तां बयां कर रहे हैं। जर्जर भवनों में ना शिक्षकों का पता और ना ही सुविधाओ का पता।
गांव छोटा चीरोला जहां आज भी बच्चों को टुटेहुए टिन टप्परो में बिठाया जा रहा है। दिवारे अपनी जगह छोड़ने को तैयार खड़ी है कब गिर जाए या अब गिर जाए। स्कूलों के शिक्षक अपने विभाग की कमजोरी उजागर करने में भयभीत दिखाई दिए।
वही पास ही के गांव लसुड़िया खेमा जहां टपकती छतों में मात्र एक शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5 वीं तक मात्र 34 बच्चों को एक कक्ष में पढा रहीहै पुछने पर बताया कि जैसे तैसे मैं इनको पढ़ाती हूं और कागजीय कार्यवाही भी पुरी करना पड़ती है शासन प्रशासन में शिक्षकों की कमी और गांव में बच्चों की कमी से यह हालत बन रहे हैं।