इंदौर। 100 बेड से ज्यादा अस्पतालों में महिला सुरक्षा को लेकर कसावट होगी। इसके लिए हर अस्पताल में एक इंटरनल कमेटी और एक विशाखा कमेटी का होना जरूरी होगा। ऐसे ही विपरीत स्थिति में तत्काल महिलाओं को मदद मिले इसके लिए जल्द ही हॉट लाइन या पैनिक बटन सिस्टम डेवलप किया जाएगा। ऐसे ही पेशेंट के पास जाने वाले परिजन की संख्या सीमित होगी। इसके साथ ही पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे और सिक्युरिटी गार्ड रखे जाएंगे। सुरक्षा गार्डों को ट्रेनिंग के लिए मॉडयूल कै तैयार किया जाएगा।
यह बात कलेक्टर आशीष सिंह ने शनिवार को एआईसीटीएसएल में आयोजित अस्पताल संचालकों-प्रतिनिधियों की बैठक में कही। इसमें करीब 40 से सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। दरअसल दो दिन पहले मुख्य सचिव ने कोलकाता रेप-मर्डर के मद्देनजर प्रदेश के सभी कमिश्नर, कलेक्टर की बैठक ली थी। इसमें शासन और सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा के दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से कराए जाने को कहा था। इसे लेकर यह बैठक आयोजित की थी।
बैठक में एमवाय अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए। बताया गया कि सुरक्षा की दृष्टि से इतना बड़ा अस्पताल कवर्ड नहीं है। इसके छह गेट हैं। इन सभी से आवाजाही रहती है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। एक अन्य मामला पुलिस की भूमिका को लेकर रहा। संचालकों ने बताया कि जब भी अस्पताल में कोई हंगामे या तोड़फोड़ की घटना होती है तो दो-तीन पुलिसकर्मी ही मौके पर पहुंचते हैं। कुछ प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि महिला सुरक्षा को लेकर एक एप बनाया जाए जो अस्पताल में सभी स्टाफ के पास हो। अगर कोई घटना होती है तो उसमें पैनिक बटन दबाते ही कंट्रोल रूम, पुलिस थाने और अस्पताल सिक्युरिटी को तुरंत सूचना मिल जाए।
राजनीतिक हस्तक्षेप बंद हो
डॉ. स्वाति प्रशांत (मेडिकल सुपरिटैंडेंट, इंडेक्स) ने बताया कि हॉस्पिटल में हर स्तर की कमेटियां बनाई गई है। साथ ही 600 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे और 70 गार्ड हैं। डॉक्टरों का इंटरनल ग्रुप बना हुआ है। इसके अलावा प्रिवेंशन और एक्शन टास्क हैं। अगर अस्पताल के ग्रुप में खुडैल थाना पुलिस को जोड़ दे तो उन्हें पुलिस को तुरंत मैसेज मिल जाएगा। इसके साथ ही कई प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और सुझाव बताएं। बैठक में डॉक्टरों ने मरीजों के इलाज में राजनीतिक हस्तक्षेप का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार गंभीर मरीज का इलाज करने के दौरान संबंधित नेताओं या उनके कार्यकर्ताओं द्वारा अपने मरीज का इलाज पहले करने पर दबाव बनाया जाता है। हेल्थ केयर का अपना सिस्टम है। इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए।
कलेक्टर ने बताया कि अकसर दो इश्यू होते हैं। एक बाहर की भीड़ और दूसरा यह कि अस्पताल में कुछ घटना होगी है। इसके लिए हर अस्पताल में एक इंटरनल कमेटी बनाई जाएगी जो सभी शिकायतों को निराकरण करेगी। इसके अलावा हर बड़े कार्यस्थल पर विशाखा कमेटी होती है वह सभी अस्पतालों में भी होना जरूरी है। ये दोनों कमेटियां बनी हैं या नहीं इसका ऑडिट किया जाएगा। ये कमेटियां काम कर रही है या नहीं, इसकी भी मॉनिटरिंग होगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में किसी भी स्थिति में डेड बॉडी को रोका नहीं जा सकता। अगर पेमेंट का कोई इश्यु है तो भी उसे बाद में सुलझाया जा।
उन्होंने कहा कि पेशेंट के साथ परिजन की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा। परिजन की संख्या ज्यादा होने से अस्पताल स्टाफ को कई तरह की परेशानियां होती है। इसे सीमित किया जाएगा। सभी अस्पतालों को संबंधित थाने से समन्वय कर नियमित मीटिंग की जाएगी। इसके साथ ही मॉक ड्रिल जरूरी होगी। अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाए। कोई भी ब्लाइंड स्पॉट न छूटे। अस्पताल की महिला स्टाफ के साथ घटनाएं होती हैं उनमें किस प्रकार की कार्रवाई के नियम हैं वे डिस्प्ले बोर्ड पर लगाए जाएं। इससे लोगों को पता चले कि संबंधित कृत्य करने पर क्या सख्त कार्रवाई हो सकती है। हर थाने में जितने भी 100 बेड क्षमता से ज्यादा वाले अस्पताल है उनकी नियमित बैठक होृगी। उन्होंने कहा कि आज जो बैठक हुई है उसकी प्रोसेडिंग जारी हर तीन महीने में बैठक आयोजित कर समीक्षा की जाएगी।