बीना। 4 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बीना में लाड़ली बहना योजना के कार्यक्रम में आ रहे हैं। बीना वालों को उप-चुनाव के पहले उनसे बड़ी घोषणा की उम्मीद है। सबसे बड़ी मांग बीना को जिला बनाने की है। लेकिन इस घोषणा को लेकर बीना के लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि परिस्थितियां कुछ अलग बन रही हैं।
बीना के लोगों ने खुरई, बीना, मालथौन, बांदरी, कुरवाई, पठारी और प्रस्तावित खिमलासा तहसील को जोड़कर मप्र के एक और नए जिले का खाका अपने जहन में उतार लिया है। इसमें अनुमानित 780 गांव तथा जनसंख्या करीब 9 लाख रहेगी। निवाड़ी जिले की जनसंख्या से दोगुनी जनसंख्या और क्षेत्रफल भी बड़ा होगा।
बीना जिला बना तो 7 तहसीलें हो सकती हैं शामिल
बीना - 1985 से मांगबीना को जिला बनाने की मांग 1985 से चली आ रही है। उस समय दुबे आयोग का गठन हुआ था। जिसने बीना समेत 25 जिले की सिफारिशें की थीं। इनमें से 8 जिले बनाए गए थे। बीना में 7 करोड़ की लागत से संयुक्त प्रशासनिक भवन बन रहा है। यह दिसंबर तक कंपलीट हो जाएगा। वर्तमान में 50 बिस्तर का सिविल अस्पताल है।
खुरई - 1964 से मांग
खुरई पुरानी तहसील है। इसका भवन ही 1912 का है। खुरई को जिला बनाने की मांग 1964 से चली आ रही है। खुरई के लोग आज भी इसी मांग पर अडिग हैं। यहां अनुविभाग स्तर के कार्यालय हैं। 100 बिस्तर का सिविल अस्पताल, निर्माणाधीन संयुक्त भवन। न्यायपालिका में दो एडीजे कोर्ट सहित तीन अन्य न्यायालय हैं। बिजली कंपनी, पीएचई विभाग का संभागीय कार्यालय मौजूद है।
3 सितंबर को खुरई बंद का आह्वान
जिला बनाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर 3 सितंबर को जिला बनाने की मांग को लेकर खुरई बंद रहेगा। समिति ने सभी व्यापारी संघ से समर्थन का आह्वान किया है। समिति द्वारा 42 दिन से तहसील परिसर में क्रमिक धरना, प्रदर्शन चल रहा है। सभी समाज, संगठन अलग-अलग जुलूस निकालकर मुख्यमंत्री को जिला बनाने ज्ञापन सौंप चुके हैं।
बन रही विरोधाभास की स्थिति
बीना को जिला बनाने में कई तरह के विरोधाभास की स्थिति भी बन रही है। राजनीतिक और भौगोलिक कारणों के बीच अफसर और नेता कुछ भी कहने से बच रहे हैं। नए जिले के लिए इंतजार और बढ़ सकता है। खुरई और कुरवाई में बीना को जिला बनाने का विरोध शुरू हो गया है। इसके अलावा सरकार कोई छोटा जिला बनाने के पक्ष में नहीं है। 2026 में होने वाले विधानसभा परिसीमन तक का सरकार इंतजार कर सकती है।