दूदरसी। आज पुरे देश में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। इसी उपलक्ष्य में गांव दुदरसी के माध्यमिक विद्यालय परिसर में प्राथमिक विद्यालय व मा वि के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक दिवस एक सादे समारोह में आयोजित किया गया। जिसमें स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपने गुरूजनों का सम्मान किया और शिक्षक दिवस के संबंध में अपनी-अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में आशीष गेहलोत एवं कुलदीप झोकरिया जनशिक्षक ने शिक्षक दिवस के उपर अपने वक्तव्य दिए। कुलदीप झोकरिया ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी, तभी से इसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। आपने बच्चों को गुरु का पद प्रभु से भी उपर बताया और कहा कि गुरू ही प्रभु से मिलने का मार्ग प्रशस्त करता है, इसलिए गुरु को भी भगवान का दर्जा माना गया है। जनशिक्षक आशीष गेहलोत ने भी उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरू उस कुम्हार की भांति है जो मटके बनाता है तो उपर से चोट मारता है और हथेलियों से उन्हें सहलाता है ताकि उसकी बनावट एक जैसी रहे वह वृकी न बन जाए। गुरु तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् जीवन के अंधकार को मिटाकर उजाले की और ले जाता है और आप लोगों को ज्ञानवान बना देता है।
इस अवसर पर शाला के प्रधानाध्यापक अनिल जैन ने कहा कि गुरु अपने बच्चों का कभी अहित नहीं करता वह कठोर हो सकता है लेकिन अपने छात्रों का सुनहरा भविष्य देखना चाहता है। अध्यापक नंदलाल पाटीदार ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रथम गुरु अपनी मां होती है वह अपने बच्चों को सुसंस्कृत करती है और जीवन का साधारण ज्ञान देती है और दूसरा गुरु अध्यापक होता है जो बच्चों को अच्छा ज्ञान देकर उनका भविष्य संवारने का काम करता है।
इस अवसर पर स्कूल के सभी अध्यापकों ने बच्चों को अपने अपने ज्ञान से आच्छादित किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि लक्ष्मी नारायण पाटीदार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। स्कूल के सभी छात्रों ने बारी-बारी से शिक्षक दिवस के उपर अपनी बात व्यक्त की जिसका उपस्थित जनों करतल ध्वनि से उनका उत्साह वर्धन किया।
सर्व प्रथम मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन माही मेंढ़ा मा वि की छात्रा द्वारा बहुत ही सुंदर ढंग से किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पायल बैरागी, इंन्द्रा बैरागी व उर्वशी बुगालिया माही मेंढ़ा ने महती भूमिका निभाई।अंत में आभार इंन्द्रा बैरागी ने व्यक्त किया।
ज्ञात रहे इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शाला के अध्यापकों ने काफी मेहनत कर इन नौनिहालों को मंच पर बोलने के लिए तैयार किया गया और आज के कार्यक्रम की सफलता ने यह दर्शा दिया की काम कोई भी कठिन हो परंतु अगर दृढ़ इच्छा हो तो वह आसान हो जाता है।