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September 6, 2024, 1:10 pm
KHABAR : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से 4 वर्ष के नन्हें तक्षिल को मिला नया जीवन, तक्षिल हृदय संबंधित जटिल बीमारी से था पीड़ित, आरबीएसके अंतर्गत हुए दो जटिल ऑपरेशन, पढ़े खबर 

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इन्दौर  चार वर्ष की नन्हीं सी उम्र और हृदय संबंधित जटिल बीमारी के दो बडे ऑपरेशन, सुनकर बड़ा अचंभा होता है कि इतनी कम उम्र में बच्चे के दो हृदय संबंधित जटिल ऑपरेशन । ऑपरेशन के बाद नन्हा बालक स्वस्थ है और सामान्य बच्चों की तरह स्कूल भी जाता है। यह संभव हुआ है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से। इंदौर के आनंद बाजार शंकर नगर निवासी श्री सौरभ नायक के 4 वर्षीय पुत्र तक्षिल नायक का स्वास्थ्य खराब रहने लगा था। कई अस्पतालों में बेटे को दिखाया। इसी दौरान उन्हें मालूम हुआ कि तक्षिल को जन्मजात हृदय संबंधी रोग है। यह सुनकर माता-पिता के होश उड़ गए। बड़े अरमानों से घर में बेटे का जन्म हुआ। बड़े ही प्यार से उसका नाम तक्षिल रखा गया। परिजन बड़े ही प्यार और दुलार से उसका लालन पालन कर रहे थे कि ऐसे में तक्षिल को ह्दय संबंधित बीमारी की जानकारी सुन माता-पिता सहित परिजनों के होश उड़ गए। स्वास्थ्य जांच के दौरान उसे को जिला चिकित्सालय स्थित आरबीएसके सेंटर पर दिखाया जाए। यहां तक्षिल की बिमारी का चिन्हांकन करते हुए इलाज संभव होने की बात बताई गई। यह सुनते ही तक्षिल के माता-पिता को कुछ राहत महसूस हुई, चुकी हृदय संबंधित जटिल बीमारी होने के कारण तक्षिल को तत्काल एसआरसीसी मुंबई स्थित चिकित्सालय के लिए रेफर किया गया, जहां उसका पहला ऑपरेशन दिसंबर 2021 में हुआ। इसके बाद उसका दूसरा आपरेषन 1 मार्च 2024 को हुआ। बेटे के ऑपरेशन और उसके जीवन की चिंता के बीच ऑपरेशन के खर्च की चिंता में तक्षिल के माता-पिता परेशान थे लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से दोनों ऑपरेशन निरूशुल्क हुए। तक्षिल के पिता श्री सौरभ नायक बताते है आज तक्षिल स्वस्थ है। वे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए आभार व्यक्त करते हुए इस कार्यक्रम को उनके बेटे के जीवन के लिए वरदान मानते है। वे बताते है आरबीएसके योजना नहीं होती तो मैं करीब 12 से 15 लाख रूपये का कर्जदार होता। प्रायवेट नौकरी से जैसे तैसे परिवार की आजीविका संचालित कर रहा हूं। उन्होंने बताया तक्षिल सामान्य बच्चों आज एलकेजी में पढ़ाई कर रहा है। योजना के लाभ से उनके बेटे को मिले नये जीवन से वे खुश है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक नव परिवर्तनकारी और महत्वकांक्षी पहल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) आरंभ किया गया है, जो की स्वास्थ्य जाँच, प्रारंभिक स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों में बीमारियों को पहचानने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सेवाओं, सहायता और उपचार आदि सेवाओं से जोड़ने की परिकल्पना करता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अकेला ऐसा कार्यक्रम है जो बच्चों के जीवन की समग्र गुणवत्ता को ऊपर उठाने के लिए कार्य कर रहा है और उन्हें अपनी सम्पूर्ण क्षमता को पाने योग्य बनाने के लिए प्रयासरत है तथा साथ ही बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम समुदाय के सभी बच्चों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम में जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जाँच शामिल है, स्वास्थ्य जाँच में चार श्रेणियों जिसमें जन्मजात रोग, कमियाँ, बीमारियाँ, विकास में देरी में श्रेणीबद्ध विभिन्न रोगों की जाँच की जाती है, ताकि इन रोगों का शीघ्र पता लगाया जा सके, बीमार बच्चों का प्रबंधन तथा निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकें। साथ ही इसमें तृतीयक स्तर पर सर्जरी भी शामिल है। इन चार श्रेणियों में श्रेणीबद्ध रोगों को 4 डी के नाम से भी जाना जाता है। यदि स्वास्थ्य जाँच में 32 रोगों में से कोई रोग पाया जाता है तो उन बच्चों को प्रारंभिक स्वास्थ्य सेवाएं जिला स्तर पर प्रदान की जाती है। ये सभी स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती है जो की परिवार को उपचार पर होने वाले खर्चाे को कम करने में सहायता प्रदान करती है। बच्चों के स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, आंगनवाड़ी केंद्रों में नामांकित 0-6 वर्ष की आयु समूह के बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। नवजात बच्चों में जन्मजात रोगों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य जाँच, स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों द्वारा की जाती हैं। आरबीएसके अंतर्गत बाल स्वास्थ्य जाँच एवं आरंभिक उपचार सेवाओं के लिए चयनित स्वास्थ्य दशाएँ 4 डी में प्रमुख है

जन्म से विकृति दोष में न्यूरल ट्यूब विकृति, डाउन्स सिन्ड्रोमकटे होंठ एवं तालु, केवल कटे तालु, टैलिप्स (क्लब फुट), कूल्हे (हिप) का ठीक से विकास न होना (डिस्प्लेसिया), जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदय रोग, दृष्टिपटल विकृति (समय से पहले जन्म लिए शिशुओं में आंखों के परिपक्व पर्दे की समस्या) होती है। पौष्टिकता के अभाव में रक्ताल्पता में विशेष रूप से गंभीर रक्ताल्पता, विटामिन ए की कमी ( बाइटॉट स्पॉट), विटामिन डी की कमी (रिकेट्स), गंभीर कुपोषण, घेघा होता है। बाल्यावस्था के रोग में त्वचा के रोग ( स्केबीज, फंगल संक्रमण एवं एक्जिमा), ओटाइटिस हृदय रोग, रूमेटिक हृदय रोग, बच्चों के दमे की शिकायत, दंत क्षय, मिर्गी अथवा ऐठन विकार होता है।

विकास संबंधी देरी एवं विकलांगता में दृष्टि दोष, श्रवण दोष, न्यूरो-मोटर दोष, हाथ-पैर को चलाने में देरी, बोध ज्ञान में विलंब, देरी से बोलना, ऑटिज्म आत्मकेंद्रित विकार (शुरुआत में 3 साल की उम्र से पहले आत्मकेंद्रित होना, सामाजिक संपर्क अथवा आदान-प्रदान में कमी, स्कूली बच्चों में नई चीजें सीखने की अक्षमता, ए.डी.एच.डी. स्कूल में ध्यान केंद्रित, ध्यान देने अथवा व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई एवं हमेशा अति सक्रियता होना (अधिक गतिविधि), अन्य जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म, सिकल सेल एनीमिया, बीटा थैलेसीमिया (वैकल्पिक), टीबी एवं लेप्रोसी है। 4 डी से प्रभावित बच्चों का चिन्हांकन आंगनवाडी केन्द्र, आरबीएसके टीम द्वारा विकासखंड एवं जिला स्तर पर चिकित्सालय में किया जाता है। यहां प्रभावित बच्चों की स्वास्थ्य जांच, उनके उपचार हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। 4 डी में से किसी भी रोग से प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए आरबीएसके की विकासखंड अथवा जिला स्तरीय  यूनिट पर संपर्क कर प्रभावित बच्चे को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाया जा सकता है।

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