नीमच। जिला मुख्यालय के नजदीक की ग्राम पंचायत रेवली देवली की बार-बार घोर लापरवाही के चलते ग्राम पंचायत के निवासरत लोग अनेकों समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जहां एक और सालों बाद में ब मुश्किल पंचों के संघर्ष करने के बाद कई बार मन्नतें करने के बाद रोड पर नवरात्रि को देखते हुए स्ट्रीट लाइट लगी वही आज भी पूरे गांव में हर गली में अंधेरा ही अंधेरा है। जो काम ग्राम पंचायत का है उस काम को रेवली देवली हायर सेकेंडरी के प्रिंसिपल राधेश्याम धाकड़ कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों पहले ही स्कूल में चार्ज लेने के बाद राधेश्याम धाकड़ ने पहले तो स्कूल और उसके आसपास की सफाई करवाई तथा लगातार कड़ी मेहनत करके स्वयं छुट्टी के दिन भी दिनभर मेहनत करके स्कूल को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है वही इन सभी कामों को देखते हुए भी ग्राम पंचायत के किसी नुमाइंदे सर पर एक जू तक नहीं रेगी। जो काम ग्राम पंचायत का है उसे काम को एक हायर सेकेंडरी स्कूल का प्रिंसिपल तथा उनके द्वारा दो अन्य कर्मी के साथ मिलकर वह स्वयं गांव की नालियों की साफ सफाई कर रहे हैं इसे देखकर हर कोई हैरान है जहां एक तरफ नवाग़त प्रिंसिपल बच्चों के स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखकर लगातार ही स्कूल और स्कूल के बाहर परिसर में एवं गांव की गलियों को जो सालों से गंदगी से सरोबार पड़ी हुई थी उनकी सफाई के लिए आमद है वही ग्राम पंचायत पर इन चीजों का कोई असर नहीं है। मानो जैसे यह उनका काम ही नहीं है। ग्राम पंचायत के सदस्य लगातार ही मीटिंग में गांव की समस्याओं को उठाते हैं लेकिन केवल वह मीटिंग तक ही सीमित रह जाती है तथा फिर वही ग्राम पंचायत की मनमर्जी मानो ग्राम पंचायत किसी और के इशारों से चल रही हो। पूरे गांव में चर्चाओं का जोर है की यदि यह प्रिंसिपल नहीं होते तो शायद आधे से ज्यादा गांव को डेंगू हो जाता। ग्राम पंचायत के उप सरपंच जितेंद्र नागदा ने ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप में लगातार ही इस बात को लेकर मामला उठाया की यदि प्रिंसिपल राधेश्याम धाकड़ साफ-सफाई का काम करते हैं तो रेवली देवली ग्राम पंचायत क्या कर रही है, तथा वहीं दूसरी ओर साल भर से ज्यादा समय बचने के बाद भी जिला पंचायत द्वारा दी गई कचरा गाड़ी भी मानो अब अपने चलने की राह देख रही है। गांव में पिछले एक-दो दिन को छोड़कर अभी तक कचरा गाड़ी केवल नाम मात्र की गाड़ी है, जो गांव में चली हो वह भी कई बार सदस्यों द्वारा बार-बार आवाज उठाने के बाद गांव में कचरा लेने निकली हो। इस तरह से पूरे गांव के हालात बहुत खराब है केवल लीपा पोती के नाम पर कागजों में स्वच्छता दर्शाई गई है, जबकि हकीकत कुछ और है। प्रतिदिन ही यहां पर जिले के कई अधिकारी आते हैं जाते हैं लेकिन अभी तक गांव के इन मामलों को लेकर कभी संज्ञान नहीं लिया गया। देखते हैं आने वाले समय में क्या कुछ इस ग्राम पंचायत को लेकर अच्छा देखने को मिलेगा अथवा वही गांव के लोग समस्याओं से जूझते रहेंगे।