भोपाल। जीवन दायिनी नर्मदा नदी के किनारों का सेटेलाईट और ड्रोन से कैचमेंट सर्वेक्षण होगा। सरकार इसकी निगरानी भी कराएगी। नर्मदा और उसकी सहायक नदियों का सीमांकन किया जाएगा। जहां अतिक्रमण हैं, वहां से अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। इसके साथ ही नर्मदा की सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा। नर्मदा किनारे बसे धार्मिक स्थलों, अमरकंटक और ओंकारेश्वर को सेटेलाईट सिटी के रूप में विकसित करने कार्ययोजना तैयार होगी। नर्मदा के किनारे बड़ी बिल्डिंग के निर्माण नहीं किए जा सकेंगे।
इस काम का रिव्यू नवम्बर के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। इसके लिए 11 विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है। मोहन सरकार ने सितम्बर में इसको लेकर मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में फैसला किया था। इस समिति में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अलावा डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहाद पटेल, परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, पीएचई मंत्री संपतिया उइके और वन मंत्री राम निवास रावत शामिल हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव और योजना,आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के एसीएस भी इस बैठक में शामिल रहे थे।
हर विभाग की अलग-अलग जिम्मेदारी तय
नगरीय विकास
नर्मदा किनारे बसे धार्मिक स्थल अमर कंटक और ओंकारेश्वर को सेटेलाईट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। अमर कंटक के समग्र विकास के लिए नर्मदा विकास प्राधिकरण बनेगा।
नर्मदा के निकट बसे शहरों का अपशिष्ट जल नर्मदा में मिलने से रोकने के लिए ट्रिटमैंट प्लांट बनाए जाएंगे। सालिड वेस्ट, लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के उपाय किए जाएंगे।
नर्मदा किनारे कन्क्रीट स्ट्रक्चर वाली बड़ी बिल्डिंग नहीं बनेंगी,अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
होटल,हास्पिटल व अन्य कॉमर्शियल एक्टिविटी से निकलने वाले ठोस-लिक्विड अपशिष्ट को कंट्रोल करने के लिए एसटीपी बनाए जाएंगे।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग
नर्मदा परिक्रमा करने वाले यात्रियों के लिए पहुंच मार्ग बनाने, रपटे, पुल, विश्राम गृह का निर्माण।
केमिकल सॉल्यूशन और मिट्टी का प्रयोग कर नई तकनीक से बनाएंगे परिक्रमा मार्ग। 10-10 किमी के पैच बनाए जाएंगे।
सूचना केंद्रों का निर्माण, जिनका संचालन स्थानीय समितियां करेंगी।
नदी के किनारे के क्षेत्रों में जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा।
वन विभाग
नर्मदा किनारे स्थित शहरी इलाकों में सघन पौधरोपण। साल, चंदन, सागौन के पौधे रोपने लोगों, स्वसहायता समूहों की मदद ली जाएगी।
अमर कंटक में मिलने वाले औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए आदिवासियों को प्रोत्साहन। कपिल धारा वन क्षेत्र का संरक्षण-संवर्धन।
किसानों को निजी भूमि पर फलदार पौधे रोपने के लिए प्रोत्साहन। जॉइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी जन सहभागिता तय करेगी।
पौधरोपण-वन संरक्षण के लिए डीपीआर बनेगी। इसे आजीविका से जोड़ा जाएगा। अवैध वन कटाई पर रोक। एग्रो फॉरेस्ट को बढ़ावा।
राजस्व और नर्मदा घाटी विकास विभाग
राजस्व विभाग तटीय इलाकों में एनजीटी, हाईकोर्ट और सरकार के निर्देशों के आधार पर फ्लड लेवल के अनुसार सीमांकन करेगा।
इसे बाकायदा नोटिफाई करने के निर्देश देते हुए साइन बोर्ड लगाने के लिए कहा गया है ताकि लोग इसका उल्लंघन न करें।
नर्मदा नदी की सहायक नदियों का सीमांकन किया जाएगा। सहायक नदियों में अतिक्रमण,प्रवाह क्षेत्र को बाधित करने वाले निर्माण चिह्नित होंगे।
नर्मदा घाटी विकास विभाग नदी के किनारे के प्रमुख स्थानों पर घाटों का निर्माण कराएगा। इसमें पुरातात्विक महत्व की चट्टानों और फॉर्मेशन का ध्यान रखा जाएगा।
जल संसाधन विभाग
नर्मदा की सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने का काम किया जाएगा।
नर्मदा कछार के क्षेत्र में वाटर शेड डेवलपमेंट के काम किए जाएंगे।
जहां पर नर्मदा नदी का संगम स्थल है वहां कटाव रोकने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से काम किया जाएगा।
योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
पंचायतों में जागरूकता और नर्मदा सेवा समितियों के गठन का काम किया जाएगा।
नर्मदा सेवा के लिए काम करने वाले लोगों, संस्थाओ के साथ संवाद, सीएम के साथ बैठक कराई जाएगी।
नर्मदा और सहायक नदियों के संरक्षण के लिए नदी महोत्सव की समन्वित नीति बनाए जाएगी।
संस्कृति, पर्यटन और धर्मस्व विभाग
नर्मदा तट पर तीज-त्योहार, मेलों की जानकारी, पहुंचने वाले लोगों की संख्या जुटाई जाएगी।
परिक्रमा पथ पर यात्री सुविधाओं का पर्यटन की दृष्टि से विकास। गांवों-आदिवासी क्षेत्रों में अच्छे होम स्टे का निर्माण।
नर्मदा संरक्षण का काम कर रहे साधु-संत, आश्रम को चिह्नित करना।
ममलेश्वर के विकास के लिए पुरातत्व विभाग से अनुमति।
लुप्त हो रहे प्राचीन आश्रमों का साधु-संतों की मदद से संरक्षण।
नर्मदा किनारे मांस-मदिरा पर प्रतिबंध। पानी की क्वालिटी की लगातार टेस्टिंग।
जैव विविधता की मैपिंग कर संरक्षण किया जाए। मशीनों की मदद से रेत खनन पर रोक।