देवास। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की दिल्ली से आई पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. रमा पांडेय ने देवास में “अमृत संचय अभियान” की गतिविधियों का अवलोकन कर सराहना की। विशेष रूप से देवास के नवाचारी और देश में मिसाल बन चुके अमृत संचय अभियान के कामों को देखने के लिए वे विशेष रूप से देवास आईं। पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. रमा पांडेय ने अमृत संचय अभियान अंतर्गत विभिन्न जल संचय संरचना स्थलों का अवलोकन किया। देवास ग्रीन्स कॉलोनी में संग्राम सिंह घाडगे के यहाँ 20 से अधिक विभिन्न जल संचय संरचनाओं का निरीक्षण कर उन्होंने इन कार्यों को सराहा और जलवायु परिवर्तन के नज़रिये से बहते पानी के साथ उपजाऊ गाद, विभिन्न पौधों एवं जंतुओं के सहअस्तित्व से स्वस्थ पर्यावरण को जैव विविधता के लिए ज़रूरी बताया तथा इसके विस्तृत अध्ययन और शोध की आवश्यकता पर भी बल दिया। रैन रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिये रमेशचंद्र पंड्या, रानीबाग के यहाँ वाटर हार्वेस्टिंग फ़िल्टर का निरीक्षण कर उन्होंने बोरिंग का पानी पीकर वर्षाजल संचय से हुये परिवर्तन की शुद्धता परखी। डॉ रमा ने देवास में 250 करोड़ लीटर वर्षाजल संचय संरचना निर्माण के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि टीम के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि बहुत कम समय में इतना बड़ा लक्ष्य हासिल किया है। इतने कम समय में इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करना वाकई अद्भुत है और जनभागीदारी से देश के लिए मिसाल बने इस कार्य को अब देशभर में अपनाने की ज़रूरत है। इस दौरान अमृत संचय अभियान देवास की टीम के प्रेरणास्रोत डॉ सुनील चतुर्वेदी, डॉ समीरा नईम, गंगासिंह सोलंकी, सफिया कुरैशी, हिमांशु कुमावत एवं विपीन पंड्या भी उपस्थित थे।