सरवानिया महाराज। शहर के सरकारी स्कूल में अब वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेकर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली बालिकाओं में आत्मरक्षा हेतु वीरता के फूल भरें जा रहे हैं।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरवानिया महाराज (सीएम राइज) में 1 सितंबर 2024 से मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार विद्यालय की एक सो बालिकाओं को रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण संकुल प्राचार्य एनके नागदा और संस्था के प्राचार्य स्मिता नागदा के निर्देश पर गेस्ट टीचर देवीसिंह देवड़ा द्वारा प्रति दिवस दिया जाता है। जिसमें सभी बालिकाएं बढ़ चढ़कर रुचि ले रही हैं। इस प्रशिक्षण से बालिकाओं को आत्मरक्षा हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। दुर फिरंगी को करने की मन में सबने ठानी थी,खुब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी। अंग्रेजी हुकूमत को सन 1857 की राज्य क्रांति में लोहा मनवाया और फिरंगियों के दांत खट्टे कर मां भारती के गौरव की सम्पूर्ण विश्व में स्थापना की। यही कारण है कि अब सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बालिकाओं को आत्मरक्षा तथा आवश्यकता पड़ने पर भारत मां के लिए तैयार रहने को लेकर प्रशिक्षित करने की ठानी है। संकुल प्राचार्य ने के नागदा ने बताया कि शहर सहित संकुल केन्द्र के अंतर्गत आने वाले बड़े स्कूलों में बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि बालिकाएं भी अप्रिय स्थिति से निपटने में सक्षम बन कर आततायियों के दांत खट्टे कर सके। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वाली देश की दुसरी ओर मध्यप्रदेश की पहली महिला थीं। पहली महिला विद्रोही दक्षिण की चेनम्मा थी जिसने अंग्रेज़ो को दांतों तले उंगलियां दबवा दी थी। इसलिए दक्षिण में रानी चेनम्मा को लक्ष्मीबाई भी कहा जाता है। देश की महिला वीरांगनाओं ने फिरंगियों को धुल चटा दी थी।