चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में आयोजित धर्म सभा में शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शिलप्रभा ने कहा कि आज माता पिता बच्चों की शिक्षा के प्रति बहुत जागरूक हैं और बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में भेजने की तैयारी करते हैं। परन्तु ये स्कूली शिक्षा उन्हें सिर्फ सांसारिक व्यवहार और डिग्रीधारी बनाने के साथ खाने कमाने का हुनर ही सिखाती है। जबकि वास्तव में बच्चों को शुरुआत में संस्कारों की शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे उनमें आपसी भाईचारा, स्नेह युक्त व्यवहार, बड़ों का सम्मान, गुरुजनों का आदर, मित्रों के साथ अच्छा बर्ताव, सुबह जल्दी उठना, रात को जल्दी सोना, अच्छे बच्चों की संगति में रहना,घर के कामों में हाथ बटाना, बड़ों का कहना मानना, उन्हें प्रणाम करना आदि गुणों का विकास हो सके। माता पिता को चाहिए की रोज शाम को बच्चों को अपने पास बिठा कर उनकी दिनभर की गतिविधियों की जानकारी लें और कहीं पर उनसे भूल हुई है तो उनको प्यार से समझायें ताकि वो आगे से सावधानी रखें। ऐसा करने से बच्चों में आत्मविश्वास बढेगा और उनका शारीरिक, मानसिक विकास अच्छी तरह से होगा और वो आपसे कोई बात नहीं छुपाएंगे और परिवार का वातावरण स्नेहयुक्त बना रहेगा। जब बच्चा आपको सब बातें बताएगा तो वो आपकी निगरानी मे रहकर जीवन में संस्कारवान बनने की दिशा मे आगे बढ़ता रहेगा, अतः बच्चे से सदा मित्रवत व्यवहार करते रहें। नानू नवकार भवन में बालिकाओं हेतु संस्कार शिविर गतिमान है। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने उत्तराध्यायन के माध्यम से बताया कि हम सदा शुभ कार्य करें एवं अशुभ कार्यों को छोड़ेंने के साथ सम्यक ज्ञान बढ़ाते रहें। महासती पुण्यप्रिया ने ठंनांग सूत्र के पांचवे ठाणे में वर्णित प्रसंग उपस्थित होने पर चातूर्मासकाल में चारित्र आत्माओं द्वारा विहार करने सम्बंधित कारणों के विषय में जानकारी दी। धर्म सभा में रूचि ललवानी ने अपने विचार व्यक्त किये। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन नारायनलाल खटोड ने किया।