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October 26, 2024, 1:13 pm
KHABAR : बुद्धिजीवियों ने जल प्रबंधन को लेकर जताई चिंता, पानी के प्रबंधन के लिए उपलब्ध पानी का सदुपयोग और बारिश के पानी को सहेजने की जरूरत, पढे़ खबर 

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इंदौर। पानी के बिना विकास बेमानी है, पानी का संवर्धन और संरक्षण जरूरी है। इंदौर में नर्मदा के महंगे पानी का दुरुपयोग कर, कार धोने, बगीचे में डालने जैसा उपयोग कर रहे है। दूसरी ओर पीने के पानी के लिए शहर की आधी आबादी परेशान हो रही है। ऐसी स्थिति में हमें पानी की फिजूल खर्ची कम कर पानी बचाने कम पानी में अपनी आवश्यकता पूरी करने जैसे आदतें डालना होगी। पानी के प्रबंधन के लिए उपलब्ध पानी का सदुपयोग, बारिश के पानी को सहेजना और उपयोग के बाद शुद्धिकरण के बाद फिर से उपयोग करने के कामों को गंभीरता पूर्वक अपनाना पड़ेगा और आने वाली पीढ़ी के लिए अभी से चिंता करना होगी। यह बातें जल प्रबंधन के विभिन्न विशेषज्ञ वक्ताओं ने डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा एसजीएसआईटीएस में जल प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार में कही।


चिंतन और अध्ययन करने की जरूरत
एसजीएसआईटीएस के डायरेक्टर संदीप नारूलकर ने कहा - सरकार की योजनाओं और अपेक्षा से ज्यादा तेजी से इंदौर शहर की जनसंख्या बढ़ रही है। जल प्रबंधन, संवर्धन के लिए बहुत गंभीरता से चिंतन और अध्ययन करने की जरूरत है। हमें सर्वे कर निश्चित करना होगी कि पानी की उपलब्धता कितनी है, आवश्यकता कितनी है, वितरण की व्यवस्था और दुरुपयोग रोकने और कम खर्चे में पानी की आवश्यकता पूरी कैसे करें, यह जनता को समझना और समझाना होगा। पानी के प्रबंधन को लेकर श्वेत पत्र सर्वाेच्च प्राथमिकता पर तैयार करना होगा।


समन्वय करने के बाद नई प्लानिंग करें
पीएचसी के पूर्व मुख्य अभियंता सुधीर सक्सेना ने कहा - शहर में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या को देखते हुए प्रस्तावित रीजनल मेट्रोपॉलिटन की योजना बनाते समय यह ध्यान रखें जाने की जरूरत है की भविष्य की सभी तरह की जरूरत को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में उपलब्ध पेयजल, जल स्रोत, ड्रेनेज सिस्टम तथा अन्य चीजें कितनी उपलब्ध है तथा भविष्य में कितनी आवश्यकता होगी। इंदौर के आसपास के गांवों तथा छोटे शहरों में वर्तमान में पेयजल की व्यवस्था, सफाई, ड्रेनेज आदि की व्यवस्था का गंभीरता पूर्वक सर्वे कर समन्वय करने के बाद नई प्लानिंग करें। उन्होंने कहा - रीजनल प्लान में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग हब जैसे शिक्षा,स्वास्थ्य, चिकित्सा, उद्योग, ऑटोमोबाइल्स, फूड प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट आदि के हब बनाने की योजना बनाते वक्त पानी की आवश्यकता, उपलब्धता, ड्रेनेज, वितरण जैसे कार्यों की प्लानिंग भी की जाए। जितना पानी उपलब्ध है उससे कैसे काम चलाया जाए, मांग कैसे कम की जाए इस पर चिंतन की जरूरत है। हमें रीजनल प्लान बनाने से पहले, प्लानिंग एरिया कितना है, आबादी कितनी है, भविष्य की आबादी, पानी की उपलब्धता एवं आवश्यकता के बारे में भी गंभीरता पूर्वक चिंतन की जरूरत है और इंदौर की आबादी, बढ़ने से रोकने के भी प्रयास तथा आसपास के क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।


रीजनल मेट्रोपॉलियन प्लान बनाना होगा
जल विशेषज्ञ सुधीन्द्र मोहन शर्मा ने कहा - जल संवर्धन की शहरी योजना बहुत जरूरी है, पानी की मॉनिटरिंग, वितरण, भू-जल पर चिंतन, बारिश के पानी को सहेजना तथा पानी का शुद्धिकरण बाद फिर उपयोग बढ़ाना होगा, शहर के बाहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ाने की कार्य योजना, वाटर मैनेजमेंट बोर्ड, शुद्धिकरण जैसी वृहद योजनाओं की जरूरत है। नगर निगम के पूर्व सिटी इंजीनियर जगदीश डगांवकर ने कहा - आगामी समय में महू, पीथमपुर, धार, देवास, उज्जैन जैसे क्षेत्रों को मिलाकर रीजनल मेट्रोपॉलिटन प्लान बनाना होगा। पहले के अनुभव गलत साबित हुए हैं, हमने पहले विकास किया फिर पानी की चिंता की है, जिससे सीवरेज सिस्टम गड़बड़ा गई है। थोड़ी सी बारिश में जल जमा होकर शहर अस्त व्यस्त हो जाता है। अतः आने वाले समय की जनसंख्या, आवश्यकता एवं उपलब्धता सभी को ध्यान में रखते हुए योजना बनाएं।


हम बारिश के पानी को सहेज नहीं पा रहे
नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी के पूर्व निदेशक मुकेश चौहान ने कहा - पहले इंदौर में स्थानीय स्तर पर कुएं, बावड़ी आदि से काम चल जाता था बाद में बिलावली, यशवंत सागर जैसे तालाब बनाए और अब नर्मदा के तीन चरणों के बाद भी आदि आबादी को पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। हम बारिश के पानी को संभाल एवं सहेज नहीं पा रहे हैं, जो व्यर्थ ही जा रहा है। उपलब्ध जल का उपयोग और मैनेजमेंट कैसे करें यह महत्वपूर्ण है।


सेमिनार में यह रहे मौजूद
परिचर्चा में पूर्व कलेक्टर सी.बी सिंह, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल की पूर्व कुलपति डॉ.निशा दुबे, इंजीनियर अतुल सेठ, पीएचसी के पूर्व मुख्य अभियंता कोमल प्रसाद, पर्यावरणविद् ओ.पी जोशी, मेघा बर्वे, फादर पायस, अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता आदि ने भी संबोधित किया। शुरू में सी.बी सिंह तथा डेवलपमेंट फाउंडेशन के ट्रस्टी आलोक खरे ने अतिथियों का स्वागत किया। शफी शेख, प्रणिता दीक्षित, दिलीप कनाडे, प्राची परिहार आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्याम पांडे ने किया। आभार आलोक खरे ने माना।

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