रतलाम। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के वोकल फॉर लोकल स्वदेशी अपनाओ’ के आह्वान पर जिले में स्थानीय उत्पादित वस्तुओं की खरीदी के लिए लोग आगे आए हैं। रतलाम मुख्यालय एवं जिले के सैलाना, पीपलोदा, जावरा, आलोट, बाजना जैसे कस्बो गांवो में स्थानीय कुम्हार से दीपावली के दिए तथा अन्य सामग्री खरीद रहे हैं।रतलाम डालू मोदी बाजार में शहर के स्थानीय मुन्नालाल प्रजापति ने ठेले पर दिए एवं अन्य दीपावली संबंधि सामग्री के विक्रय की दुकान लगाई है। उनकी दुकान पर शहर के विष्णु अग्रवाल दिए खरीदते हुए मिले, चर्चा में अग्रवाल ने बताया कि पहले वह लग्जरी दुकान पर सामग्री खरीदने जा रहे थे परंतु मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आह्वान सुनकर वे दिए खरीदने के लिए अपने शहर के मुन्नालाल प्रजापति की दुकान पर आए हैं।
अग्रवाल ने लगभग 100 रुपए के दीए ख़रीदे। उन्होंने कहा कि वाकई मुख्यमंत्री यादव की मंशा अनुसार सभी नागरिकों को स्थानीय प्रजापति समाज के दुकानदारों से ही दिए खरीदना चाहिए जिससे कि यह परंपरागत व्यवसाय उन्नति करें। स्थानीय उत्पादन की खरीदी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलता है । मुन्नालाल की दुकान पर शहर के दीनदयाल नगर की रहने वाली ग्रहणी मनीषा वसुनिया और अलकापुरी की रहने वाली आभा शर्मा ने भी दीपावली के दिए तथा दीप मालाएं खरीदी। उन्होंने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान को सराहनीय बताते हुए कहा कि सभी लोगों को स्थानीय उत्पादों को ही खरीदना चाहिए ताकि अपने शहर तथा गांव के प्रजापति समाज के व्यक्तियों को प्रोत्साहन मिले।रतलाम शहर में डालुमोदी बाजार में मिट्टी के दिए बेच रहे प्रजापति समाज के शिव कुमार ने चर्चा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की वोकल फार लोकल की अपील के कारण इस वर्ष मिट्टी के दिए की मांग में गत वर्ष की तुलना में बढोत्तरी हुई है। उनके पडोस में खडे हुए बालू प्रजापति ने बताया कि करीब डेढ दो महीने पहले से ही मिट्टी के दिए, बर्तनों व मूर्तियों के निर्माण में उनके परिवार जुटे हुए थे। इस बार मुख्यमंत्री डा. यादव के आव्हान के कारण अच्छे व्यवसाय की उम्मीद है। उन्होंने समझदारी की बात करते हुए कहा कि मिट्टी के दियों से वायु प्रदुषण कम होता है, स्वदेशी वस्तुओं को बढावा मिलता है। परिवार के हर व्यक्ति को काम मिल जाता है, मिट्टी के दियों की मांग बढने से सबसे ज्यादा लाभ यह हुआ है कि प्रजापति समाज को आजीविका मिलने के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती मिली है।