भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा गांधी सागर में चीतों की बसाहट का फैसला लेने के बाद अब राजस्थान और एमपी सरकार चीता कॉरिडोर पर जॉइंट वर्किंग पर फोकस करेगी। कूनो अभयारण्य में चीतों की बसाहट में सफलता मिली है। ऐसे में अब केंद्र सरकार के निर्देश पर चीतों को अंतरराज्यीय भ्रमण के लिए छोड़ने और टूरिज्म को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। इसी के मद्देनजर एमपी और राजस्थान सरकार एक साथ मिलकर चीता कॉरिडोर पर काम करेंगी।
सरकार द्वारा इसके लिए बनाई गई कमेटी राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के एरिया में एमपी और राजस्थान से जुड़े क्षेत्रों की विजिट करेगी। इन क्षेत्रों में कूनो और रणथंभोर आदि शामिल हैं। इसमें दोनों राज्यों के हिसाब से जॉइंट टूरिज्म रूट की संभावनाओं को तलाशने का काम किया जाएगा। यह समिति हर तीन माह में एमपी और राजस्थान सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी।
यह काम भी करेगी जॉइंट कमेटी
मोहन सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी एमपी-राजस्थान में आइडेंटिफाईड लोकेशन पर चीता कॉरिडोर के विकास के सुझाव देगी। इसके साथ ही कॉरिडोर प्रबंधन के अध्ययन के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच एमओयू भी किया जाएगा। इस कमेटी द्वारा अधिकारी और फ्रंट-लाइन कर्मचारी चीतों की कैपेसिटी बिल्डिंग का काम करेंगे। भविष्य में माइग्रेशन की स्थिति में एरिया डेवलपमेंट और प्री-ओगमेंटेशन बेस की अनुशंसा कमेटी द्वारा की जाएगी।