सीहोर। रबी की बोवनी के साथ खाद की किल्लत भी शुरू हो गई है। एक बोरी खाद के लिए सोसायटियों के बाहर किसान रतजगा करने को मजबूर हैं। कहीं खाद नहीं होने से सोसायटियों में सन्नाटा पसरा है। ये हाल हैं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के। भास्कर के 6 रिपोर्टरों ने जिले की सोसायटियों पर शुक्रवार सुबह पहुंचकर हालात देखे। कहीं किसान खाद लेने के लिए सोसायटियों के बाहर रतजगा करते दिखे। कहीं खाद नहीं होने से सन्नाटा था।
ये हालात इसलिए भी बन रहे हैं क्योंकि जिले में रबी का रकबा 4 लाख 1 हजार 580 हेक्टेयर में है। इसके लिए 80 हजार टन खाद की डिमांड है। जबकि लक्ष्य के मुकाबले अभी तक 23 हजार 327 टन यूरिया ही आया है। यानी अभी तक 29 फीसदी ही खाद आ सका है। इसी तरह डीएपी की डिमांड 29 हजार टन है, आया सिर्फ 8232 टन। एसएसपी की डिमांड 25 हजार टन है, अभी 4122 टन आया है। इसके चलते संकट जैसे हालात हैं। जैसे ही किसानों को पता चलता है कि सोसायटी में खाद आया है, कहीं रात से तो कहीं अल सुबह ही खरीदी केंद्रों पर पहुंच जाते हैं।
जौरा- जहां पेशाब घर वहीं काउंटर, महिलाएं मुंह बांधकर बैठती हैं
खाद के लिए किसानों को यातनाओं जैसी परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है। मुरैना के जौरा की पुरानी तहसील परिसर में खाद बंटता है। जहां खाद काउंटर है वहां लोग पेशाब करते हैं। पास ही में पुरुष टॉयलेट है। नंबर आ सके इसके लिए महिलाएं और पुरुष किसान यहां सुबह 4 बजे से 8 बजे तक मुंह बांधकर बैठते हैं। दुर्गंध सहते हैं। इसके बाद भी खाद मिलने में किसानों को 8 दिन का समय लग रहा है। क्योंकि यहां नियम ही ऐसे बनाए गए हैं। जौरा में पहली बार किसान अपना ऑरीजनल आधार कार्ड जमा कराने लाइन में लगते हैं। इसके बाद उन्हें टोकन के लिए 4 दिन बाद की डेट मिलती है।
दतिया- खाद लेने रात में ही थाने पहुंचे किसान
दतियाद्य दतिया जिले में रबी सीजन में 81 हजार 400 टन यूरिया, डीएपी, एनपीके आदि खादों की डिमांड शासन के पास भेजी गई है, लेकिन एक अक्टूबर से अब तक जिले में सिर्फ 24 हजार 57 टन ही खाद उपलब्ध हो सका है। प्राइवेट दुकानों पर डीएपी खत्म हो चुका है। डीएपी की तीन बोरी के लिए किसान को थाने पर रात गुजारनी पड़ रही है। 12 घंटे से ज्यादा इंतजार करने के बाद किसान को खाद मिलता है। उधर, कैलारस में शुक्रवार को थाने में टोकन बांटने आए कर्मचारियों ने 20 मिनट में मार्केटिंग सोसाइटी समेत मार्कफेड से दी जाने वाली खाद के टोकन बांटे और चले गए।