उज्जैन। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है। इस बार नवमी तिथि 10 नवंबर रविवार को मनाई गई। इस दिन भगवान विष्णु और आंवला के पेड़ का पूजन किया जाता है। महिलाओं ने पूजन कर सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि आंवला की पूजन करने से स्वास्थ्य, सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी से पूर्णिमा तिथि तक त्रिदेव आंवला के वृक्ष पर निवास करते है।
उज्जैन में भी रविवार को कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आंवला नवमी के रूप में मनाई गई। शहर के कई मंदिरों व घरों में लगे आंवला वृक्ष का पूजन महिलाओं द्वारा किया गया।
अखंड ज्योत हनुमान मंदिर के पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने बताया
कार्तिक के महीने में भगवान विष्णु का पूजन होता है। मान्यता है कि तीन देवियों मे प्रतिस्पर्धा हुई थी। भगवान ब्रह्मा जी ने तीन देवी को जड़वत होने का श्राप दिया था। माता लक्ष्मी आंवला के पेड़ में जड़वत हुई है तो भगवान विष्णु की पूजा के साथ लक्ष्मी स्वरूप में भी आंवला का पूजन किया जाता है। पूजन के बाद एक आंवला अपनी तिजोरी में रखा जाता है।
अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने व्रत
जितनी भी औषधियां हैं, उन्हें हमारे ऋषि मुनि ने धर्म से जोड़कर रखा है। जिससे उनका अस्तित्व बना रहे। प्रत्येक चीज को धर्म से जोड़ कर पूजनीय बनाया गया है। आंवला नवमी पर आंवला के वृक्ष की पूजा करना उसकी प्रदक्षिणा करना श्रेष्ठ रहता है। आंवला नवमी के दिन किया गया पुण्य खत्म नही होता है। महिलाओं ने भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद आंवला के वृक्ष की जड़ में दूध, जल, पुष्प और चावल चढ़ा कर घी का दीपक जलाकर मिठाई का प्रसाद अर्पित किया। महिलाओं द्वारा वृक्ष पर पीला व लाल धागा बांधकर 7, 11, 21 बार परिक्रमा कर स्वास्थ्य, सुख, अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त करती है।