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November 11, 2024, 12:18 pm
KHABAR : डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. कामत ने रखी आधारशिला, जैविक और रासायनिक खतरों से निपटने में सक्षम होगी डीआरडीओ की ग्वालियर लैब, पढे़ खबर 

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भोपाल। भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ग्वालियर में देश की सबसे अत्याधुनिक लैब बनाने जा रहा है। यह जैविक और रासायनिक खतरों से निपटने में मदद करेगी। यह लैब इंटरनेशनल पैरामीटर्स पर आधारित, बायो सेफ्टी लेवल-4 (बीएसएल-4) सुविधाओं से लैस होगी और इसे देश की दूसरी ऐसी लैब के रूप में स्थापित किया जाएगा।


इस लैब में रक्षा महत्व से जुड़े बैक्टीरिया और वायरस पर शोध किया जा सकेगा। डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने रविवार को ग्वालियर के महाराजपुर डांग परिसर में इस लैब की आधारशिला रखी। डॉ. कामत ने ग्वालियर में बने बायो-डिटेक्टर, टेस्ट एंड एवैल्युएशन फैसिलिटी (बीडीटीईएफ) का भी उद्घाटन किया।


डॉ. कामत ने कहा- हम तेजी से बदलती हुई दुनिया में रह रहे हैं, जिसमें रासायनिक और जैविक खतरों की आशंका बहुत बढ़ गई है। कोविड महामारी जैसे संकट भविष्य में फिर से सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है, और इसके लिए हमें रासायनिक और जैविक रक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी।


उन्होंने यह भी बताया कि ग्वालियर का यह नया बीएसएल-4 लैब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शीर्ष लैबोरेट्री की श्रेणी में होगा। इस लैब को वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशाला के रूप में स्थापित करने के लिए डीआरडीई को न केवल शिक्षा और उद्योग जगत, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समन्वय पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा।


इस अवसर पर डीआरडीई ग्वालियर के निदेशक डॉ. मनमोहन परीडा भी शामिल थे। कार्यक्रम में डीआरडीओ के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिकों में डॉ. यूके सिंह (जैव विज्ञान), डॉ. मनु कोरुला (संसाधन और प्रबंधन) और कर्नल विश्वजीत चौबे (निदेशक, सिविल वर्क और संपदा) भी शामिल हुए।


महामारी और जैव सुरक्षा पर देश-दुनिया के 400 वैज्ञानिक आज से करेंगे मंथन
भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) में 11 से 13 नवंबर तक वायरोकॉन-2024 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा। यह आयोजन इंडियन वायरोलॉजिकल सोसाइटी (आईवीएस) द्वारा किया जा रहा है। इसका उद्घाटन सोमवार को ग्वालियर के तानसेन मार्ग स्थित डीआरडीई परिसर में होगा। इसमें देश-विदेश के 400 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शोधार्थी शामिल होंगे। सम्मेलन में महामारी और जैव सुरक्षा से संबंधित जरूरी मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।

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