ग्वालियर। देश में खतरनाक वायरस व उनसे उभरने वाले रोगों से निपटने के लिए पशु, पौधों व मानव में वायरस के प्रभाव का संयुक्त रूप से अनुसंधान जरूरी है। बर्ड फ्लू, जीका, इबोला, केएफडी व मंकी पॉक्स जैसे वायरस जानवरों से इंसान में आए हैं। हमारी फूड चेन एक है वायरस किसी से किसी में पहुंच सकता है। इसके परीक्षण के लिए हम कॉमन किट पर भी बात कर रहे हैं।
जिससे हम वायरस की आसानी से पहचान कर उसके व्यवहार व प्रभाव को समझ कर नियंत्रण के लिए बेहतर प्रयास कर सकें। यह बात इंडियन वायरोलॉजिकल सोसाइटी (आईवीएस)के महासचिव डॉ.यशपाल मलिक ने सोमवार को डीआरडीई के सभागार में वायरोकॉन सम्मेलन के पहले दिन कही।
उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार है जब आईवीएस सम्मेलन का आयोजन डीआरडीओ की प्रयोगशाला में हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि विषाणु (वायरस) और जीवाणु (बैक्टीरिया) हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा है एवं उनके अस्तित्व मानव जाति के पूर्व से है। वायरस भी अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए अपने आप में निरंतर परिवर्तन करता रहता है। अतरू मनुष्य को उनकी पहचान करते हुए उनके विपरीत प्रभावों से बचाए रखने की चुनौती है।
सम्मेलन में कुल 400 से अधिक वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और आईवीएस के सदस्यों ने भाग लिया। डॉ. मनमोहन परीडा ने डीआरडीई की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का परिचय देते हुए देश-विदेश में उभरती वायरस जनित बीमारियों से निपटने के प्रयासों पर जानकारी दी। आईवीएस के अध्यक्ष प्रो. आरके रथो ने कोविड महामारी का जिक्र करते हुए विषाणु विज्ञान के क्षेत्र में आईवीएस के योगदान का परिचय दिया।
साथ ही उन्होंने निपाह और मंकी पॉक्स की चुनौतियों पर भी बात की। इस अवसर पर आयोजन सचिव डॉ.पीके दास भी मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में देशभर में विषाणु विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनुसंधानकर्ताओं को आईवीएस पुरस्कार भी दिए गए।
मिट्टी के विज्ञान से विषाणु विज्ञान के शोध को जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विवि के कुलपति प्रो. अरविंद शुक्ला ने कहा कि पोषण और प्रकृति से सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और विषाणु विज्ञान के शोध को जोड़ा जाना चाहिए ताकि भविष्य में महामारियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। सम्मेलन में दिल्ली एमबीपीवीआर द्वारा बाहर से आने वाले खाद्य पदार्थों की परीक्षण प्रक्रिया को और सख्त करने पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने पैकेजिंग को और सुरक्षित बनाकर वायरस संक्रमण के जोखिम को कम करने के सुझाव भी दिए।