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November 13, 2024, 5:06 pm
KHABAR : छोटे-छोटे नियम भी आत्म कल्याण दिला सकते हैं-साध्वी सुचिता श्रीजी मसा, महावीर जिनालय ‌में साध्वी सोम्यरेखा की निश्रा में धर्म आगम तपस्या प्रवाहित, पढे़ खबर 

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नीमच। छोटे-छोटे नियम लेने से जीव दया का पुण्य बढ़ता है। पाप कर्म घटता है और पुण्य परोपकार का फल बढ़ता है।मन का भाव पवित्र हो तो आत्म कल्याण का मार्ग सरलता से मिल सकता है। परोपकार के कर्म का फल अवश्य मिलता है इसलिए सदैव परोपकार के कर्म  निरंतर पवित्र भाव के साथ  करते रहना चाहिए। तभी कल्याण हो सकता है।


छोटे-छोटे नियम भी आत्म कल्याण करवा सकते हैं। यदि हम छोटे से नियम का भी पालन करते हैं तो पाप कर्मों का क्षय होता है। ।यह बात साध्वी सोम्यरेखा श्री जी महाराज साहब की सुशिष्या साध्वी सुचिता श्रीजी मसा ने कही।वे जैन श्वेतांबर महावीर जिनालय ट्रस्ट विकास नगर श्री संघ  के तत्वाधान में श्री महावीर जिनालय  आराधना भवन नीमच में धर्म आगम पर्व के उपलक्ष्य मेंआयोजित धर्म सभा में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि‌  यदि हम पंच द्रव्य का उपयोग करने का संकल्प लेते हैं तो हमारे पाप कर्म काम हो जाते हैं और पुण्य कर्म बढ़ जाते हैं इसी प्रकार यदि हम 14 नियम और 12 व्रत का पालन करते हैं तो संसार काम होता है और पुण्य बढ़ जाता है। आधुनिक युग में लोग पंचकखाण का संकल्प करने से पीछे हटते हैं छोड़ने की जिंदगी है। लेने जैसा संयम है लेकिन लोग चिंतन नहीं करते हैं। चिंतन का विषय हैं। त्याग की सच्चाई होती है ।यदि हम सोते समय भी खाने-पीने का त्याग का का संकल्प ले तो भी अनेक पाप कर्मों से बच सकते हैं। जीवन पर्यंत प्रतिदिन व्रत नियम का संकल्प लेवे तो हमारे पाप कर्म तो कम होते ही है लेकिन यदि अचानक मृत्यु हो जाए तो यह पचकखाण हमें  सद्गति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हमारी सद्गति होना तय हो जाती है ।इसलिए पंचकखाण नियमों का पालन जीवन पर्यंत करना चाहिए ताकि कभी भी मृत्यु हो तो सद्गति आवश्यक हो और मोक्ष का मार्ग मिल जाए। संकल्प नहीं लेते हैं तो हमारी सद्गति नहीं हो सकती दुर्गति हो सकती है। हमारे विचार शुद्ध शुभ होंगे तो आयु पी शुभ और शुद्ध होगी जीवन में कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए। प्रतिदिन सत्य बोलने का संकल्प लेकर जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए ताकि पुण्य बढ़ता रहे और पाप कर्म होते रहें। हम 1 घंटे झूठ नहीं बोलेंग, 1 घंटे फेसबुक मोबाइल नहीं चलाएंगे का संकल्प भी ले सकते हैं तो हमारा पाप कर्म कम हो सकते है। छोटे-छोटे नियम भी हमें सद्गति दिला सकते हैं। जैसे रात्रि भोजन, हरी सब्जी व जमीकंद का त्याग ऐसे छोटे-छोटे नियमों का पालन करें तो भी हमारा पुण्य कर्म बढ़ सकता है।परोपकार के बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है। इसे जीवन में सदैव ध्यान रखना चाहिए। हमें गलती होने पर क्षमा मांगना चाहिए। क्षमा हमारे जीवन का पुण्य कर्म बढ़ाती है पाप कर्म को घटाती है।


साध्वी महाराज साहब ने भीमसेन सुशीला शूरसेन आदि की कथा का वर्तमान परिपेक्ष में महत्व प्रतिपादित किया। इस वर्षावास में सागर समुदाय वर्तिनी सरल स्वभावी दीर्घ संयमी प.पू. शील रेखा श्री जी म.सा. की सुशिष्या प.पू.सौम्य रेखा श्री जी म सा, प.पू. सूचिता श्री जी म सा, प.पू.सत्वरेखा श्री जी म साआदि ठाणा 3 का चातुर्मासिक उपवास जप व विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ तपस्या प्रवाहित हो रही है।


श्री संघ अध्यक्ष राकेश आंचलिया जैन, सचिव राजेंद्र बंबोरिया ने बताया कि प्रतिदिन 9 बजे‌ चातुर्मास में धार्मिक विषयों पर ‌विशेष अमृत प्रवचन श्रृंखला का आयोजन हो रहा है। समस्त समाज जनअधिक से अधिक संख्या में पधार कर धर्म लाभ लेवें एवं जिन शासन की शोभा बढ़ावे।

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