चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में चतुर्मासिक प्रवचन करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि ज्ञानियों के अनुसार कर्म बांधना सरल है परन्तु उन कर्मों को तोड़ना बहुत कठिन है अतः कर्म करते समय बहुत ही विवेक एवं सज़गता रखनी चाहिए। अंतराय कर्म के विषय में समझाते हुए आगे उन्होंने बताया कि यदि आप भोजन कर रहे हैं तो भोजन का कभी तिरस्कार ना करें, भोजन बनाने एवं कराने वाले का पूरा आदर सम्मान करें साथ ही बहुत ही प्रेम के साथ भोजन करें तथा उसमें कोई कमी ना निकाले। कोई इंसान या पशु पक्षी भोजन कर रहे हैं तो उस समय उनके भोजन में किसी तरह कि रुकावट ना डालें और उनसे कोई ज़रूरी काम भी हो तो भोजन करने के बाद उनको काम बतावे इससे आपके भोगन्तराय कर्म टूटेंगे और इसके फलस्वरूप आपको बिना किसी रुकावट के अच्छी से अच्छी वस्तुएँ खाने को मिलती रहेगी और सबकी दुआएं भी आपके साथ रहेगी। आप दूसरों को अंतराय नहीं देंगे तो दूसरे भी आपके हितैषी बने रहेंगे और हर वक्त आपका ध्यान रखेंगे। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि स्वाध्याय के माध्यम से हमें अपना अंतरावलोकन करते रहना चाहिए और अपनी कमियों को धीरे धीरे दूर करते हुए जिनवाणी का सहारा लेकर जीवन को उर्द्धगामी बनाने हेतु सज़ग रहना चाहिए। महासती पुण्यप्रिया द्वारा प्रवचन में से प्रश्न पूछ कर उत्तर प्राप्त किये गए। धर्म सभा में सुजान पोखरना एवं लक्ष्मी पोखरना ने विचार व्यक्त किए। साध्वी रत्ना राजश्री जी ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के मंगल पाठ सुनाया। संचालन संघ मंत्री इन्द्रेश कोठारी ने किया।