इंदौर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के रिटायर्ड प्रो. डॉ. मनोहर भण्डारी ने डीन डॉ. संजय दीक्षित को खुला पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए लिखा कि क्या पेंशनर के मरने के बाद शासन का आदेश का पालन करेंगे। प्रोफेसर के पत्र वायरल होते ही एमजीएम प्रबंधन ने उनके खाते में 71 हजार रु. ट्रांसफर भी कर दिए।
डीन डॉ. संजय दीक्षित को लिखे खुले पत्र में सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. मनोहर भंडारी ने सरकार द्वारा मंजूर ग्रेड पे स्कीम के क्रियान्वयन में देरी पर अपनी निराशा व्यक्त की है। इसके लिए वे सितंबर 2015 में पात्र हुए थे। डॉ. भंडारी 31 दिसंबर, 2020 को मेडिकल कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए। फिर भी 10 जनवरी, 2023 को उनके हक का आधिकारिक आदेश जारी होने के लगभग दो साल बाद भी लाभ का भुगतान नहीं किया गया।
पत्र में डॉ. भंडारी ने कॉेलेज प्रशासन के साथ संपर्क बनाए रखने के बार-बार प्रयासों पर जोर दिया। इसमें फोन कॉल, मैसेज और 28 जुलाई, 2023 को डॉ. दीक्षित के साथ व्यक्तिगत बैठक का भी जिक्र है। जब कोई गति नहीं मिली तो डॉ. भंडारी ने मामले को मंत्री के समक्ष उठाया था। इसके बाद डॉ. दीक्षित ने 29 अगस्त, 2023 को डॉ. भंडारी और सरकार दोनों को जवाब दिया लेकिन पेमेंट नहीं हुआ।
खास बात यह कि डॉक्टर ने पेंशन संबंधी शासन के आदेशों का समय पर करने को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया। इस बीच, एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने गुरुवार को डॉ. भंडारी को उनके पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने के चंद मिनट बाद ही बकाया राशि के रूप में 71,516 रुपए जारी कर दिए।
बकाया राशि जारी, मामला ट्रेजरी में लंबित
डॉ. दीक्षित के मुताबिक हमने डॉ. भंडारी को 71,516 रुपए का बकाया जारी कर दी है। उनका मामला ट्रेजरी में लंबित था। हमने इसके लिए पत्र भेजा था। हालांकि, डॉ. भंडारी ने उन्हें जारी की गई राशि पर नाराजगी जताई और मेडिकल कॉलेज द्वारा जमा की गई राशि उनकी जानकारी के बिना उनके खाते में जमा करने पर सवाल भी खड़े किए हैं।