चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन करते हुए शांतक्रांति संघ की विदुषी महासती साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने कहा कि आज़ चातुर्मास की पूर्णता का दिन है, आज़ हम सबको ये चिंतन करना है कि अनंत सिद्ध एवं अरिहंतो कि तरह हमें भी कर्मों के भार को हल्का करते हुए पूर्णता को प्राप्त करना है। इस हेतु हमें अपनी संकल्प शक्ति को जगाते हुए मन को मज़बूत बनाना होगा और देव गुरु धर्म में समर्पणता बढ़ा कर जिनवाणी में श्रद्धा रखते हुए उसी अनुसार आचरण करना होगा तो ही हम आत्मविकास के रास्ते पर आगे बढ़ कर सिद्ध बुद्ध मुक्त अवस्था को पाने वाले बनेंगे। इससे पूर्व महासती पुण्यप्रिया, महासती सत्यप्रभा एवं महासती शीलप्रभा ने धर्म सभा के समक्ष आह्वान किया कि वर्षावास के दौरान जो त्याग तापश्या एवं ज्ञानर्जन किया है इस क्रम को निरंतर जारी रख कर कर्मों के भार को हल्का करते हुए जिनशासन की जाहोजालाली करते रहें। संघ अध्यक्ष सुरेश लोढ़ा ने कहा की आचार्य भगवंत की असीम कृपा हुई और हमें आप जैसी ज्ञानी ध्यानि विदुषी महासतीवर्याओ का चातुर्मास मिला। इस हेतु हम सभी आचार्य भगवंत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुएआपके प्रति हुई किसी भी तरह की अविनय आशातना के लिए क्षमा याचना करते हैं। आपने यहां पधार कर हम सब पर बहुत ही उपकार किया है और जिनवाणी के द्वारा प्रतिपल सज़ग रहने की प्रेरणा दी है जिसे हम कभी भुला नहीं सकेंगे। कृतज्ञता ज्ञापित करने के क्रम में लक्ष्मी पोखरना, महिला मण्डल, सुरेश लोढ़ा, सुनीता रांका, मोहन लाल पोखरना, नारायण लाल खटोड, यामिनी बोहरा, दिलखुश मेहता, अशोक जैन, रघुवीर जैन, रतन लाल भड़कत्या, प्रदीप मट्ठा, मधु मट्ठा, पारस सोनी, बालिका मण्डल, चेतन भड़कत्या एवं इन्द्रेश कोठारी ने अपने विचार व्यक्त किये। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने लक्ष्मीलाल खेरोदिया को तेला तप एवं अन्य प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। महासतियाँ जी का मंगल विहार कल सुबह सूर्याेदय पश्चात् नानू नवकार भवन से देवेंद्र पोखरना के निवास पर होने की सम्भावना है। संचालन संघ मंत्री इन्द्रेश कोठारी ने किया।