इंदौर। शहर में मौसम विभाग 5 नए केंद्र शुरू करने जा रहा है। इन पर दिसंबर से काम शुरू होगा। इसमें 3 केंद्र बाहरी क्षेत्र में बनेंगे तो 2 मध्य व पूर्वी इलाके में होंगे। एयरपोर्ट का केंद्र मिलाकर अगले साल से 6 केंद्रों से मौसम की सटीक भविष्यवाणी और आंकड़े मिलने लगेंगे।
इस सिस्टम के बनने के बाद पूरे शहर में मौसम के विशेष पैटर्न, माइक्रोक्लाइमेट का विश्लेषण ज्यादा सही होगा। मौसम विभाग ने इसके लिए एक विस्तृत प्लान तैयार किया है। इसमें शहर के साथ ही आसपास की तहसीलों को भी शामिल किया गया है। योजना में शहरी एरिया के लिए वर्तमान मौसम केंद्र एयरपोर्ट के साथ मध्य शहर में जूनी इंदौर और उत्तर-पूर्व में विजयनगर को चिह्नित किया है।
फोरकास्टिंग एरिया को पूरे जिले में फैलाते हुए महू, देपालपुर और सांवेर में भी मापन केंद्र बनाने की तैयारी की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है, भोपाल सहित कई शहरों में इसी तरह अलग-अलग जोन में बांट कर तापमान, बारिश व मौसम के अन्य कारकों का मापन किया जा रहा है। इसके लिए अब आधुनिक तकनीक आ गई है।
20 किमी दूर तक एक जैसे आंकड़े रखने पड़ रहे अभी
01 ही केंद्र हैं अभी शहर में
06 केंद्र हो जाएंगे शहर में
03 तहसीलों में भी बनाए जाएंगे मापन केंद्र
अभी ये गड़बड़... पश्चिम में 39 इंच, पूर्व में 34 से कम बारिश, पर आंकड़े पश्चिम के ही मान्य
इंदौर में अभी सिर्फ एयरपोर्ट मौसम केंद्र के आंकड़े अधिकृत माने जाते हैं। कृषि कॉलेज में वर्षा मापी यंत्र व अन्य सुविधाएं हैं, लेकिन उन आंकड़ों को सरकार नहीं मानती। इस साल बारिश के सीजन में एयरपोर्ट मौसम केंद्र पर 39 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि पूर्वी शहर में कृषि कॉलेज में 34 इंच के लगभग बारिश हुई।
शहर के औसत 36 इंच के हिसाब से एयरपोर्ट पर पर्याप्त बारिश है, लेकिन कृषि कॉलेज क्षेत्र में कम। अब ये आंकड़े माने नहीं जाते, इसलिए एयरपोर्ट से 20 किमी दूर शहर में भी उसी बारिश के आंकड़े को आधार माना जाता है। ठंड और गर्मी में भी पूर्वी और पश्चिमी शहर में अंतर है, पर अभी इनके मापन की कोई सुविधा नहीं।
अब ऐसे काम करेंगे नए मौसम केंद्र
6 केंद्र काम करेंगे, जिसमें शहर और आसपास के सभी क्षेत्र कवर हो जाएंगे। हर क्षेत्र का तापमान, बारिश अलग पता चलेगी।
चार दिन के मौसम, बारिश व आर्द्रता की भी सटीक जानकारी मिल सकेगी।
क्षेत्र के अनुसार भविष्यवाणी में आसानी होगी, हीट वेव, कोहरे की स्थिति के साथ ही ठंड के दिनों में धुंध, कोल्ड वेव आदि के बारे में पुख्ता जानकारी दी जा सकेगी।
स्टेशन की बजाय सिर्फ राडार व सैटेलाइट से मापन होगा
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश सिंह का कहना है, टेक्नोलॉजी ने अब मापन कार्य को आसान बना दिया है। आधुनिक टेक्नोलॉजी से वर्तमान मौसम केंद्रों को अपग्रेड कर सुविधा तैयार की जा रही है। क्षेत्र विशेष के लिए स्टेशन बनाने की जरूरत नहीं होगी। राडार, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के उपयोग से यह कार्य किया जा सकेगा।
जो डाटा मिलेगा, उसे अत्याधुनिक मौसम मॉडल से विश्लेषण करके सही जानकारी दी जाएगी। ये राडार मौजूदा सरकारी भवनों पर लगा सकते हैं। नया भवन बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।